चेन्नई। पर्यावरण संरक्षण को अंतरराष्ट्रीय कानून की कसौटी पर परखते हुए भावी पीढ़ियों के हितों की रक्षा का संकल्प वीआईटी चेन्नई में मंगलवार को मुखर रूप में सामने आया, जब अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण विषय पर एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन ने वैश्विक मंच पर पर्यावरणीय उत्तरदायित्व, कानूनी दायित्वों और न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका को नए सिरे से रेखांकित किया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि नीदरलैंड्स के द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के न्यायाधीश श्री लियोनार्डो नेमर काल्डेरा ब्रांट रहे, जिन्होंने सायंकालीन सत्र में समापन संबोधन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीआईटी के उपाध्यक्ष डॉ. जी. वी. सेल्वम ने की, जबकि मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार ने विशेष संबोधन के माध्यम से पर्यावरण न्याय के संवैधानिक और वैश्विक आयामों पर प्रकाश डाला।

अपने प्रभावशाली वक्तव्य में श्री ब्रांट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का एक प्रमुख उद्देश्य देशों द्वारा पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए ठोस और सकारात्मक कदम सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक राष्ट्र का दायित्व है कि वह जलवायु प्रणाली को क्षति से बचाने के लिए आवश्यक सतर्कता और सावधानी बरते। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण कानून और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कानूनों के विकास के साथ-साथ आईसीजे की भूमिका को विस्तार से समझाया। इस क्रम में उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, पर्यावरणीय क्षति, समुद्री संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों के महत्वपूर्ण उदाहरण भी प्रस्तुत किए।

वीआईटी के उपाध्यक्ष डॉ. जी. वी. सेल्वम ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा और कानून का कठोर पालन भविष्य में पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरणीय चेतना और कानूनी समझ को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। वहीं न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अलग अंतरराष्ट्रीय न्यायालय स्थापित करने के प्रयास समय-समय पर हुए हैं, लेकिन अब तक वे साकार नहीं हो पाए हैं, जिससे मौजूदा न्यायिक ढांचे की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वीआईटी चेन्नई के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. टी. त्यागराजन तथा वीआईटी स्कूल ऑफ लॉ के डीन प्रो. डॉ. सी. रब्बीराज की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मेलन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण अब केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय का अनिवार्य स्तंभ बन चुका है, जिसकी अनदेखी भविष्य के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है।

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Pratahkal Newsroom

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