मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण हजारों फ्लाइट्स हुए कैंसल ; क्या बढ़ने वाली है यात्रियों की परेशानी?
मिडिल ईस्ट संघर्ष के कारण जेट ईंधन की कीमतों में भारी उछाल से मई 2026 में वैश्विक स्तर पर 13,000 उड़ानें रद्द हुईं और 20 लाख सीटें घटीं। लुफ्थांसा, तुर्की एयरलाइंस सहित कई कंपनियों ने कटौती की, भारत में भी एयर इंडिया पर असर दिख रहा है।

एयरपोर्ट के रनवे पर एक विमान में जेट ईंधन भरने के लिए खड़ा फ्यूल टैंकर
मई 2026 वैश्विक विमानन उद्योग के लिए एक निर्णायक मोड़ बनता दिख रहा है, जहां मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने आसमान की रफ्तार को धीमा कर दिया है। दुनिया भर में एयरलाइनों ने लगभग 13,000 उड़ानों को रद्द कर दिया है, जिससे करीब 20 लाख सीटें अचानक शेड्यूल से गायब हो गई हैं। यह कुल वैश्विक उड़ान क्षमता का भले ही 2 प्रतिशत से कम हिस्सा हो, लेकिन इसका प्रभाव यात्रियों की योजनाओं और एयरलाइन संचालन पर गहराई से पड़ रहा है।
इस संकट की जड़ मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष है, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रम, जिसने वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को प्रभावित किया है। इस समुद्री मार्ग के बाधित होने से जेट ईंधन की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल आया है। कई क्षेत्रों में इसकी कीमत दोगुनी से अधिक हो चुकी है, जबकि वैश्विक स्तर पर 70 से 110 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। चूंकि ईंधन लागत किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा होती है, इसलिए कंपनियां अपने परिचालन को टिकाऊ बनाए रखने के लिए मजबूरन उड़ानों में कटौती कर रही हैं।
यूरोप के प्रमुख हब इस्तांबुल और म्यूनिख में उड़ानों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। तुर्की एयरलाइंस और जर्मनी की प्रमुख एयरलाइन लुफ्थांसा ने बड़े पैमाने पर कटौती की है। लुफ्थांसा ने अपने सिटीलाइन सब्सिडियरी के माध्यम से संचालित 20,000 शॉर्ट-हॉल उड़ानों को कम कर दिया है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
हालात उस समय और बिगड़े जब अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के बंद होने के बाद जेट ईंधन की कीमतें तेजी से उछल गईं। हालांकि, ब्रिटेन से संचालित कई शॉर्ट-हॉल एयरलाइंस ने अपने ईंधन की कीमतों को पहले से ही हेज कर रखा है, जिससे उन्हें तत्काल लागत वृद्धि का सामना नहीं करना पड़ रहा। ईजीजेट और विज़ एयर जैसी कंपनियों ने दबाव के बावजूद अपनी समर शेड्यूल को पूरा करने का भरोसा जताया है, हालांकि उनके ईंधन खर्च का एक हिस्सा अब भी जोखिम में बना हुआ है।
उद्योग के सूत्रों के अनुसार फिलहाल ईंधन की आपूर्ति में कोई तात्कालिक कमी नहीं है, क्योंकि आमतौर पर छह सप्ताह तक की आपूर्ति की स्पष्टता रहती है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि मिडिल ईस्ट में संघर्ष जारी रहता है, तो यूरोप को जेट ईंधन की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
इस चुनौतीपूर्ण माहौल में एयरलाइंस कई रणनीतिक कदम उठा रही हैं। कम लाभ वाले रूट्स को बंद किया जा रहा है, उड़ानों की आवृत्ति घटाई जा रही है और ईंधन बचाने के लिए छोटे विमानों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। साथ ही, कुछ मामलों में टिकट कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी भी देखी जा रही है। इस वैश्विक संकट का असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। एयर इंडिया जैसी कंपनियां बढ़ती एटीएफ लागत के चलते अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती कर रही हैं। भारतीय यात्रियों को आने वाले समय में महंगे टिकट, ईंधन सरचार्ज और सीमित अंतरराष्ट्रीय विकल्पों का सामना करना पड़ सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
