बदल गए Geopolitics के समीकरण; भारत करेगा France से Rafale का सौदा और बदले में होगी स्वदेशी 'Pinaka' की निर्यात
भारत और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक रक्षा समझौता! ₹3.5 लाख करोड़ की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील के साथ ही फ्रांस ने भारतीय 'पिनाका' रॉकेट सिस्टम में दिखाई दिलचस्पी। अमेरिकी HIMARS को टक्कर देने वाला पिनाका अब नाटो देशों की पसंद बन रहा है। जानें भारत के इस रक्षा मास्टरस्ट्रोक की पूरी जानकारी, तकनीकी तुलना और रणनीतिक महत्व।

India France Defense Deal
India France Defense Deal : वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की छवि अब केवल एक खरीदार की नहीं, बल्कि एक सक्षम निर्यातक की बन चुकी है। रक्षा संबंधों के एक नए और अभूतपूर्व अध्याय में, भारत और फ्रांस एक ऐसी 'मेगा डील' की ओर बढ़ रहे हैं जो न केवल सैन्य शक्ति को बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय स्वदेशी तकनीक का लोहा पूरी दुनिया में मनवाएगी। जहाँ एक ओर भारत अपनी वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को अंतिम रूप दे रहा है, वहीं दूसरी ओर फ्रांस अपनी सेना की जरूरतों के लिए भारत के 'पिनाका' मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (MBRL) को खरीदने में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है।
फरवरी 2026 में रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने 114 राफेल विमानों के लिए 'प्रस्ताव की स्वीकृति' (AoN) दे दी है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये ($40 बिलियन) है। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा सौदा माना जा रहा है। इस सौदे के तहत करीब 90 विमानों का निर्माण भारत में ही 'मेक इन इंडिया' के तहत किया जाएगा। लेकिन इस बार कहानी केवल खरीदारी की नहीं है; फ्रांस की एक उच्च स्तरीय कमेटी ने हाल ही में भारत का दौरा कर 'पिनाका' सिस्टम का गहन मूल्यांकन किया है, जो भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात की एक बड़ी जीत है।
पिनाका बनाम दुनिया : मारक क्षमता का तुलनात्मक विश्लेषण
पिनाका रॉकेट सिस्टम को दुनिया के सबसे घातक आर्टिलरी सिस्टम्स में गिना जा रहा है। इसका सीधा मुकाबला अमेरिका के प्रसिद्ध HIMARS और रूस के Tornado-S से है। जहाँ अमेरिकी सिस्टम अपनी सटीक दूरी के लिए जाना जाता है, वहीं पिनाका अपनी 'रैपिड फायर' क्षमता और किफायती होने के कारण फ्रांस जैसे नाटो देशों को आकर्षित कर रहा है।
प्रमुख तकनीकी तुलना (Technical Comparison) :
विशेषता | पिनाका (Pinaka Mk-II/III) | अमेरिकी HIMARS | रूसी Tornado-S |
निर्माता | DRDO (भारत) | लॉकहीड मार्टिन (USA) | NPO Splav (रूस) |
फायरिंग स्पीड | 44 सेकंड में 12 रॉकेट | 45 सेकंड में 06 रॉकेट | 38 सेकंड में 12 रॉकेट |
धिकतम रेंज | 75-90 किमी (Mk-III: 130 किमी) | 70-499 किमी (GMLRS/PrSM) | 120-200 किमी |
अनुमानित लागत | ~₹2.3 करोड़ प्रति सिस्टम | ~₹19.5 करोड़ प्रति सिस्टम | ~₹15-18 करोड़ |
विशेषता | शूट एंड स्कूट, पहाड़ी क्षेत्रों में घातक | उच्च सटीकता (GPS गाइडेड) | विशाल विनाशक क्षमता |
फ्रांस की दिलचस्पी और रणनीतिक महत्व :
फ्रांस अपनी सेना के पुराने M270 रॉकेट सिस्टम को अपग्रेड करना चाहता है। चूंकि फ्रांस के अपने स्वदेशी सिस्टम को विकसित होने में समय लगेगा, इसलिए वह तत्काल आवश्यकता के लिए पिनाका को एक विश्वसनीय विकल्प मान रहा है। आर्मेनिया पहले ही भारत से यह सिस्टम खरीदकर युद्धक्षेत्र में इसकी क्षमता देख चुका है। पिनाका की सबसे बड़ी ताकत इसकी 'शूट एंड स्कूट' तकनीक है, जो फायर करने के तुरंत बाद अपनी जगह बदल लेती है, जिससे दुश्मन के रडार और जवाबी हमले से बचना आसान हो जाता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
