Iran-US peace talks Pakistan 2026 : मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों पर एक बार फिर अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगे हैं। पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की ऐतिहासिक मध्यस्थता वार्ता से ठीक पहले ईरान के सख्त रुख ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच उपजा गतिरोध अब उस मोड़ पर आ गया है, जहाँ से शांति का रास्ता धुंधला पड़ता दिखाई दे रहा है। 21 अप्रैल को दोनों देशों के बीच घोषित दो सप्ताह के संघर्षविराम की समय-सीमा समाप्त हो रही है, लेकिन समाधान की जगह तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक बार फिर चेतावनी भरी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।

इस बेहद नाजुक मोड़ पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। रॉयटर्स के अनुसार, जनरल मुनीर ने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी शांति वार्ता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। ईरान ने लेबनान में संघर्षविराम के बाद इस रास्ते को खोला था, लेकिन महज 24 घंटे के भीतर दोबारा की गई नाकेबंदी ने वार्ता की मेज सजने से पहले ही उम्मीदों को तगड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने इस बातचीत के दौरान पाकिस्तानी सेना प्रमुख को आश्वासन दिया है कि वह उनकी सलाह पर गंभीरता से विचार करेंगे।

इस्लामाबाद में इस बीच सुरक्षा और कूटनीतिक हलचलें अपने चरम पर हैं। रविवार को नूरखान एयरबेस पर अमेरिका के चार सैन्य विमानों की लैंडिंग ने इन कयासों को हवा दी कि वार्ता की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। इन विमानों में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की गाड़ियाँ और आधुनिक सुरक्षा उपकरण शामिल बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही, अमेरिकी सीक्रेट सर्विस के 22 अधिकारी भी सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिए पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर इस हफ्ते दूसरे दौर की बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं, हालांकि इस बार जेडी वेंस का दौरा प्रस्तावित नहीं है।

शांति की इन कोशिशों के बीच ईरान का रुख कड़ा बना हुआ है। तेहरान ने अमेरिका की लंबी मांगों की सूची को देखते हुए फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि देश के तकनीकी अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हॉर्मुज की नाकेबंदी और परमाणु संप्रभुता के इस टकराव ने 21 अप्रैल की डेडलाइन को और भी विस्फोटक बना दिया है। यदि आगामी कुछ घंटों में कूटनीतिक स्तर पर कोई बड़ा चमत्कार नहीं होता, तो मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की चपेट में आ सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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