झारखंड के गढ़वा जिले के बरगढ़ थाना क्षेत्र में बैंक की कथित लापरवाही के कारण एक आदिवासी बुजुर्ग की मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान रतन लकड़ा के रूप में हुई है, जिनकी मौत इलाज के अभाव में हो गई। परिजनों का आरोप है कि बैंक खाते में पैसे होने के बावजूद ई-केवाईसी पूरी न होने के कारण राशि जारी नहीं की गई, जिससे समय पर इलाज नहीं हो सका। घटना के बाद सोमवार को आक्रोशित ग्रामीण और परिजन शव के साथ झारखंड ग्रामीण बैंक पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया।

परिजनों के अनुसार, रतन लकड़ा को अपने ग्रामीण बैंक खाते में सरकारी पेंशन मिलती थी, जिससे वे अपना इलाज करवाते थे। आरोप है कि बैंक मैनेजर ने ई-केवाईसी कराने के नाम पर उन्हें तीन महीने तक कार्यालय के चक्कर कटवाए। बाद में क्षेत्रीय प्रबंधक के निर्देश पर जब परिजन मरणासन्न स्थिति में बुजुर्ग को बैंक लेकर पहुंचे और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की गई, तब भी उन्हें पैसे नहीं मिले। परिजनों का दावा है कि बैंक की इसी लेतलाली और लापरवाही के कारण रतन लकड़ा को उपचार नहीं मिल पाया और अंततः सोमवार को उनकी मृत्यु हो गई।

मृतक की बहू फूलमणि टोप्पो ने आरोप लगाया कि बार-बार गुहार लगाने और कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी बैंक ने पैसे जारी नहीं किए। वहीं, दूसरी ओर बैंक के कैशियर विकास कुमार ने इन आरोपों का खंडन किया है। बैंक का कहना है कि ई-केवाईसी पूरी होने के बाद परिवार का कोई सदस्य राशि निकालने बैंक नहीं आया था, इसलिए कोई भुगतान नहीं हुआ। बैंक ने किसी भी प्रकार की राशि रोके जाने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि खाते में पैसा मौजूद है। इस पूरे मामले को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और परिजनों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Pratahkal Newsroom

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