G20 summit 2025 - 26 : जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन इस बार वैश्विक राजनीति के एक अनपेक्षित मोड़ का मंच बन गया, जब शामिल देशों ने अमेरिका की गैर-मौजूदगी और उसके सार्वजनिक विरोध के बावजूद जलवायु परिवर्तन पर एक ऐतिहासिक संयुक्त घोषणापत्र पारित कर दिया। यह कदम न केवल जी 20 की पारंपरिक प्रक्रिया से अलग था, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को स्पष्ट रूप से दरकिनार करने जैसा भी माना गया।

सम्मेलन की शुरुआत में ही घोषणापत्र को स्वीकार करना एक असामान्य कदम था। आमतौर पर इसे कार्यवाही के अंत में पारित किया जाता है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने सम्मेलन की ओपनिंग सेशन में ही घोषणा की कि सभी देशों के बीच व्यापक सहमति पहले ही बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अधिक देरी अब स्वीकार्य नहीं है। उनके प्रवक्ता विंसेंट मैग्वेन्या ने बताया कि यह निर्णय अभूतपूर्व समर्थन और लगातार वर्षभर चली कठिन मेहनत का परिणाम था।

अमेरिका ने इस घोषणापत्र की भाषा पर आपत्ति जताते हुए पूरे शिखर सम्मेलन का बहिष्कार किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका पर दबाव डाला था कि उनकी अनुपस्थिति में किसी भी स्थिति में संयुक्त दस्तावेज़ को मंज़ूरी न दी जाए। लेकिन प्रिटोरिया ने इसे नकारते हुए स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक संकट पर पीछे हटना संभव नहीं है।

दक्षिण अफ्रीका ने यह भी स्वीकार किया कि वॉशिंगटन और प्रिटोरिया के बीच तनाव बढ़ा है, और अमेरिका द्वारा अंतिम समय में उठाई गई आपत्तियाँ किसी भी प्रकार से सम्मेलन की कार्यवाही को रोक नहीं सकीं। इसीलिए घोषणापत्र को ना केवल निर्धारित समय से पहले पारित किया गया, बल्कि सर्वसम्मति से स्वीकार करते हुए यह संदेश भी दिया गया कि वैश्विक जलवायु कार्रवाई किसी एक देश की राजनीतिक इच्छा पर निर्भर नहीं रह सकती।

इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयब एर्दोगन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस शामिल थे।

अमेरिकी बहिष्कार और कूटनीतिक तनाव के बावजूद दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा लिया गया यह फैसला आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय जलवायु नीतियों को नई दिशा दे सकता है। जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन इसलिए ऐतिहासिक बन गया क्योंकि इसमें पहली बार एक महाशक्ति की गैर-मौजूदगी में वैश्विक सहमति बनी—और जलवायु परिवर्तन पर दुनिया ने एक स्वर में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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