आसमान में उड़ती पतंगों से लेकर जमीन पर रक्षा सौदों तक भारत-जर्मनी का ऐतिहासिक मिलन: मोदी और मर्ज़ ने रचा भविष्य की ऊर्जा और रक्षा का नया ब्लूप्रिंट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की ऐतिहासिक मुलाकात में रक्षा और ग्रीन हाइड्रोजन सहित 19 बड़े समझौतों पर मुहर लगी। 1.24 बिलियन यूरो की ग्रीन फंडिंग और रक्षा व्यापार के सरलीकरण ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। जानें इस शिखर वार्ता के सभी महत्वपूर्ण बिंदु।

गांधीनगर/अहमदाबाद: भारत और जर्मनी के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 साल के सफर में आज एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय जुड़ा, जिसने न केवल एशिया बल्कि यूरोप की राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के बीच अहमदाबाद और गांधीनगर में हुई उच्च-स्तरीय शिखर वार्ता ने दोनों देशों के रिश्तों को 'सीमारहित' (Limitless) बनाने का संकल्प लिया है। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों महाशक्तियों ने कुल 19 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए, जो विशेष रूप से रक्षा व्यापार के सरलीकरण और ग्रीन हाइड्रोजन बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित हैं।
दिन की शुरुआत साबरमती रिवरफ्रंट पर एक अनूठे नजारे के साथ हुई, जहाँ पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ ने 'अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026' में एक साथ पतंग उड़ाकर दोनों देशों के बीच गहरी होती दोस्ती का संदेश दिया। साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद, दोनों नेता गांधीनगर के महात्मा मंदिर पहुँचे, जहाँ गंभीर कूटनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हुआ। इन वार्ताओं के केंद्र में जर्मनी की अत्याधुनिक तकनीक और भारत की विशाल औद्योगिक क्षमता का मेल था।
रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए, दोनों देशों ने 'डिफेंस इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन' के लिए एक साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके लिए चांसलर मर्ज़ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्षा व्यापार की प्रक्रियाओं को सरल बनाने से न केवल दोनों देशों की सेनाओं के बीच विश्वास बढ़ेगा, बल्कि यह सह-विकास और सह-उत्पादन (Co-production) के नए द्वार खोलेगा। इस समझौते का उद्देश्य भारत की रक्षा क्षेत्र में रूस पर निर्भरता को कम करना और स्वदेशी विनिर्माण को वैश्विक गुणवत्ता देना है।
वहीं, ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में 'ग्रीन हाइड्रोजन' को लेकर हुआ समझौता एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। भारत की कंपनी AM Green और जर्मनी की Uniper Global Commodities के बीच ग्रीन अमोनिया की खरीद का बड़ा सौदा हुआ है। इसके साथ ही, चांसलर मर्ज़ ने ग्रीन और सतत विकास साझेदारी (GSDP) के तहत भारत को 1.24 बिलियन यूरो की अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। यह कोष नवीकरणीय ऊर्जा, ई-बस सेवा और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण में उपयोग किया जाएगा।
आधिकारिक पक्ष के अनुसार, दोनों नेताओं ने वैश्विक चुनौतियों जैसे यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के संकट पर भी विस्तार से चर्चा की। चांसलर मर्ज़ के साथ आए उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी के 23 प्रमुख सीईओ शामिल थे, जिनमें इन्फिनियन टेक्नोलॉजीज के अधिकारी भी थे, जिन्होंने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास के लिए भारत के साथ हाथ मिलाया है।
समापन सत्र में, प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जर्मनी का यह गठबंधन केवल दो देशों का नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता और समृद्धि का एक सशक्त स्तंभ है। चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की यह यात्रा, जिसमें उन्होंने अपनी पहली आधिकारिक एशियाई यात्रा के लिए भारत को चुना, यह स्पष्ट करता है कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत अब जर्मनी का 'पसंदीदा साझेदार' बन चुका है।

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