Strait of Hormuz crisis : पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार जब सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के अपने समकक्षों का स्वागत करने के लिए आगे बढ़े, तो एक पल के लिए उनका संतुलन बिगड़ा और वे धड़ाम से जमीन पर आ गिरे। यह दृश्य केवल एक शारीरिक चूक नहीं, बल्कि विश्लेषकों की नजर में पाकिस्तान की वर्तमान कूटनीतिक हैसियत का एक जीवंत प्रतीक बन गया है। एक ऐसा देश जिसका अपना आंतरिक ढांचा आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के भूचाल से हिल रहा है, वह आज ईरान-अमेरिका जैसे वैश्विक महाशक्तियों के बीच 'शांतिदूत' और 'चौधरी' बनने का सपना देख रहा है। रविवार को इस्लामाबाद में हुई चार देशों की यह हाई-प्रोफाइल बैठक इसी विरोधाभास की भेंट चढ़ गई।

दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की कगार से बचाने का दावा करने वाली इस बैठक में सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान, तुर्किये के हाकन फिदान और मिस्र के बद्र अब्देलत्ती ने शिरकत की थी। बैठक का मुख्य एजेंडा एक महीने से जारी ईरान युद्ध को रोकना और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को दोबारा खुलवाना था। इस जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा हुआ है और कीमतें आसमान छू रही हैं। पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका और ईरान, दोनों का करीबी बताकर एक मध्यस्थ की भूमिका पेश की थी, लेकिन बैठक का नतीजा इशाक डार के लड़खड़ाते कदमों जैसा ही साबित हुआ—धरातल पर कुछ नहीं बदला, बल्कि युद्ध की आग और ज्यादा भड़क गई।

कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बैठक से पहले ही मिस्र की ओर से एक प्रस्ताव व्हाइट हाउस को भेजा गया था। इस प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:

  • होर्मुज फीस मॉडल : स्वेज नहर की तर्ज पर होर्मुज जलडमरूमध्य में भी जहाजों से फीस वसूलने का एक औपचारिक ढांचा तैयार करना।
  • क्षेत्रीय कंसोर्टियम : तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब द्वारा एक साझा कंसोर्टियम बनाना, जो इस जलमार्ग से तेल की सुरक्षित आवाजाही को नियंत्रित करे।
  • पाकिस्तानी भागीदारी : इस प्रस्तावित कंसोर्टियम में पाकिस्तान को भी शामिल होने का न्यौता दिया गया है, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे।



हालांकि, इस कूटनीति का असर जमीन पर शून्य नजर आया। जहां एक तरफ पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के संपर्क में हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान ने किसी भी दबाव में झुकने से साफ इनकार कर दिया है। अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक 15-सूत्रीय 'एक्शन लिस्ट' भेजी थी, जिसे तेहरान ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके जवाब में ईरान ने अपना 5-सूत्रीय प्रस्ताव सामने रखा है, जिसमें ईरानी अधिकारियों की हत्याएं बंद करने, युद्ध का हर्जाना देने और होर्मुज पर ईरान का पूर्ण संप्रभु अधिकार मानने जैसी कड़ी शर्तें शामिल हैं। अमेरिका और ईरान के इन दो विपरीत ध्रुवों के बीच इस्लामाबाद की यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक जमावड़ा बनकर रह गई।

बैठक की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण तब मिला जब इशाक डार ने सोशल मीडिया पर इस 'महासम्मेलन' की उपलब्धि गिनाई। उन्होंने गर्व से बताया कि ईरान ने होर्मुज से केवल 20 पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है। यानी जिस बैठक का उद्देश्य वैश्विक शांति और तेल संकट का समाधान था, वह पाकिस्तान के लिए महज अपने चंद जहाजों का रास्ता साफ करवाने तक सीमित रह गई। इसी बीच, जब इस्लामाबाद में कूटनीति की मेज सजी थी, तब आसमान से मिसाइलें बरस रही थीं। इजरायल ने हमलों की नई लहर का ऐलान किया और तेहरान धमाकों से गूंज उठा। अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने हजारों अतिरिक्त मरीन भेज दिए हैं, जो इस बात का संकेत है कि कूटनीति की फाइलें अब बारूद के धुएं में दब चुकी हैं।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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