नागालैंड के मॉलवॉम रेलवे स्टेशन पर पहली बार सीमेंट से लदा मालगाड़ी रेक पहुँचने के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई गति मिली है। एनएफआर की इस पहल से पूर्वोत्तर में लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचे के विकास को मजबूत आधार मिला है।


मालीगांव/गुवाहाटी। पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। नागालैंड के मॉलवॉम रेलवे स्टेशन पर पहली बार एक सीमेंट रेक की सफल डिलीवरी के साथ न केवल एक नई शुरुआत हुई, बल्कि क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं को भी बल मिला है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) ने 24 सितंबर को तेलंगाना से नागालैंड तक सीमेंट से लदे एक मालगाड़ी रेक को सफलतापूर्वक मॉलवॉम रेलवे स्टेशन पर अनलोड कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। यह पहली बार है जब इस स्टेशन तक किसी भारी मालवाहक रेक की आवाजाही हुई है, जिससे इस क्षेत्र में माल ढुलाई सेवाओं की शुरुआत को औपचारिक रूप से चिह्नित किया गया।

तेलंगाना स्थित माय होम इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भेजे गए इस रेक में कुल 41 वैगन थे, जो लगभग 2,624 टन सीमेंट लेकर नागालैंड के मॉलवॉम स्टेशन पर शाम 6:45 बजे पहुँचे। यह रेक मेसर्स नॉर्थ ईस्ट इंफ्रा नेटवर्क के लिए भेजा गया था। यह रेक मेल्लाचेरुवु (तेलंगाना) से चलकर 2,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर पूर्वोत्तर के एक कठिनभौगोलिक क्षेत्र तक पहुँचा, जो रेलवे की संचालन क्षमता और लॉजिस्टिक नेटवर्क के विस्तार की स्पष्ट मिसाल है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह केवल एक रेक की आवाजाही नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने की एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। एनएफआर की यह पहल न केवल नागालैंड बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को गति देने और व्यापारिक संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे डिमापुर-कोहिमा रेलवे लाइन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यह रेलवे लाइन 82.50 किलोमीटर लंबी है, जो असम के धनसिरी से शुरू होकर नागालैंड के ज़ुब्ज़ा तक जाती है। इस मार्ग में कुल आठ स्टेशन शामिल हैं—धनसिरी, धनसिरीपार, शोखुवि, मॉलवॉम, फेरिमा, पिफेमा, मेंगुज़ुमा और ज़ुब्ज़ा।

रेल परियोजना में भौगोलिक और संरचनात्मक दृष्टि से भी काफी चुनौतियाँ थीं, जिनमें 27 बड़े पुल, 149 छोटे पुल, 20 सुरंगें, 5 रोड ओवर ब्रिज और 15 रोड अंडर ब्रिज शामिल हैं। इन सुरंगों की कुल लंबाई ही 31 किलोमीटर है, जो इस परियोजना की तकनीकी जटिलता को दर्शाती है।

उल्लेखनीय है कि इस रूट का पहला खंड—धनसिरी से शोखुवि (16.5 किमी)—का उद्घाटन अक्टूबर 2021 में किया गया था, और तब से शोखुवि स्टेशन से अरुणाचल प्रदेश के नाहरलगुन तथा मेघालय के मेंदीपथार तक यात्री ट्रेन सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इसके बाद मार्च 2025 में 14.64 किलोमीटर लंबा शोखुवि से मॉलवॉम सेक्शन भी तैयार हो गया, जिसने मालवाहक ट्रेनों की संभावनाओं को सशक्त आधार दिया।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि यह विकास क्षेत्र में "सस्टेनेबल लॉजिस्टिक नेटवर्क" की स्थापना की दिशा में एक निर्णायक कदम है। एनएफआर की योजना है कि भविष्य में इस मार्ग के माध्यम से अन्य प्रकार की माल ढुलाई भी नियमित रूप से की जाए, जिससे नागालैंड और आसपास के राज्यों में निर्माण कार्य, औद्योगिक उत्पादन और व्यापार को गति मिल सके।

रेलवे की इस पहल से न केवल नागालैंड के आंतरिक क्षेत्रों को बेहतर ढंग से जोड़ा जाएगा, बल्कि स्थानीय रोजगार, निर्माण सामग्री की उपलब्धता और निवेश की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

मॉलवॉम स्टेशन पर पहला सीमेंट रेक पहुँचने की यह घटना केवल एक परिचालन उपलब्धि नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की ओर संकेत करती है। इससे नागालैंड सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र को राष्ट्रीय मुख्यधारा से बेहतर ढंग से जोड़ने की दिशा में रेलवे का एक और ठोस कदम जुड़ गया है।

Updated On 26 Sept 2025 10:52 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story