पहले पीटा, डराया-धमकाया, फिर दिया ज़हर; बांग्लादेश में फिर से और एक हिंदू की हुई दर्दनाक मौत
बांग्लादेश के सुनामगंज जिले में 19 वर्षीय हिंदू युवक जॉय महापात्रो की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि पहले उसके साथ मारपीट की गई और फिर जहर खाने को मजबूर किया गया। यह घटना देश में लगातार बढ़ रही हिंदू विरोधी हिंसा की कड़ी का हिस्सा है।

minority violence in bangladesh : बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गुरुवार, 8 जनवरी 2026 को देश के सुनामगंज जिले में 19 वर्षीय हिंदू युवक जॉय महापात्रो की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि एक स्थानीय व्यक्ति ने जॉय के साथ पहले बेरहमी से मारपीट की और बाद में उसे जबरन जहर खाने के लिए मजबूर किया गया, जिसके चलते उसकी जान चली गई।
परिजनों के अनुसार, गंभीर रूप से घायल जॉय महापात्रो को तत्काल सिलहट स्थित एमएजी ओस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उसकी हालत नाजुक बताई थी, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जॉय की मौत के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और परिवार न्याय की मांग कर रहा है।
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब बांग्लादेश में लगातार हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटनाएं रिपोर्ट हो रही हैं। इससे कुछ ही दिन पहले, 6 जनवरी 2026 को नरसिंदी जिले के पालाश उपजिला के चारसिंधुर बाजार इलाके में 40 वर्षीय हिंदू व्यक्ति मोनी चक्रवर्ती पर धारदार हथियारों से हमला किया गया था, जिसमें उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इस हत्या ने भी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
मोनी चक्रवर्ती की हत्या से कुछ घंटों पहले ही जेसोर जिले से एक और सनसनीखेज मामला सामने आया था। वहां एक हिंदू व्यवसायी और स्थानीय अखबार के कार्यकारी संपादक को अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके अलावा, जेसोर के ही केशबपुर उपजिला में कोपालिया बाजार क्षेत्र में आइस फैक्ट्री चलाने वाले प्रताप को 5 जनवरी 2026 की शाम उनकी फैक्ट्री के बाहर बुलाकर एक गली में ले जाया गया, जहां उन्हें गोली मार दी गई। प्रताप एक स्कूल शिक्षक के पुत्र थे और पिछले दो वर्षों से अपना व्यवसाय चला रहे थे।
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का यह सिलसिला दिसंबर 2025 से लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। 18 दिसंबर 2025 को मैमनसिंह जिले में कथित ईशनिंदा के आरोप में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को कट्टरपंथी इस्लामिक भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। इतना ही नहीं, उसकी हत्या के बाद शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा की थी।
इसी कड़ी में 50 वर्षीय हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास पर भी बेरहमी से हमला किया गया था और उन्हें जिंदा जला दिया गया। गंभीर रूप से झुलसे खोकन चंद्र दास की तीन दिन बाद अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार हो रही इन हत्याओं के बीच जॉय महापात्रो की मौत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय भय और असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है। देश में कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी टिकी हुई हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
