FARA का बड़ा खुलासा: 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका में लगाई मदद की गुहार, पर क्या मिली कामयाबी?
2025 में भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका में 60 बार सांसदों और प्रशासन से संपर्क कर लॉबिंग की। FARA दस्तावेज़ों ने ऑपरेशन सिंदूर, कश्मीर आतंकी हमले, ट्रंप प्रशासन तक पहुंच और पाकिस्तान की कूटनीतिक बेचैनी का खुलासा किया।

डोनाल्ड ट्रम्प और शाहबाज़ शरीफ
भारत और पाकिस्तान के बीच 2025 में उभरे सबसे गंभीर सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तान ने पर्दे के पीछे अमेरिका में असाधारण कूटनीतिक सक्रियता दिखाई। नए विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के दस्तावेज़ों से यह सामने आया है कि भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने अमेरिकी सांसदों और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साधने के लिए लगभग 60 बार ईमेल, फोन कॉल और बैठक अनुरोध किए। यह प्रयास अप्रैल के अंतिम सप्ताह से जून 2025 तक चला, जब दक्षिण एशिया एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा था।
तनाव की शुरुआत जम्मू-कश्मीर में हुए एक आतंकी हमले से हुई, जिसमें पर्यटकों को निशाना बनाया गया और 26 लोगों की मौत हो गई। इस हमले के बाद भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। यह कार्रवाई हाल के दशकों में भारत-पाकिस्तान के बीच सबसे तीव्र सैन्य टकराव मानी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय स्पष्ट चेतावनी दी थी कि भारत की सैन्य कार्रवाई “केवल रोकी गई है, समाप्त नहीं हुई,” जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और गहरी हो गई।
इसी पृष्ठभूमि में पाकिस्तान ने अमेरिका में तेज़ी से कूटनीतिक गतिविधियां शुरू कीं। FARA फाइलिंग के अनुसार, पाकिस्तान ने सquire पैटन बोग्स सहित छह प्रमुख अमेरिकी लॉबिंग फर्मों को सक्रिय किया। इन फर्मों के माध्यम से अमेरिकी सांसदों, नीति निर्माताओं और ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक सीधी पहुंच बनाने की कोशिश की गई। दस्तावेज़ों में “अत्यावश्यक” ईमेल, त्वरित कॉल और लगातार बैठक अनुरोधों का उल्लेख है, जिनका उद्देश्य भारत पर दबाव बनवाना और संभावित दोबारा हमलों को रोकना था।
पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से कश्मीर हमले में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की मध्यस्थता से स्वतंत्र जांच की मांग की। हालांकि, इन लॉबिंग दस्तावेज़ों से संकेत मिलता है कि आधिकारिक बयानों के समानांतर पाकिस्तान के भीतर गहरी चिंता और रणनीतिक घबराहट मौजूद थी। भारत की ओर से सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने की आशंका ने इस कूटनीतिक दौड़ को और तेज़ कर दिया।
रिकॉर्ड बताते हैं कि पाकिस्तान हर साल लगभग 50 लाख डॉलर अमेरिकी लॉबिंग फर्मों पर खर्च करता रहा है। 2025 के संकट के दौरान इस निवेश का उपयोग विशेष रूप से तेज़ी से निर्णय लेने वाले अमेरिकी सत्ता केंद्रों तक पहुंच के लिए किया गया। ट्रंप प्रशासन के संभावित रुख और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए पाकिस्तान के लिए यह प्रयास निर्णायक माने जा रहे थे।
अंततः दोनों देशों के बीच संघर्षविराम हुआ और तत्काल सैन्य टकराव टल गया, लेकिन अमेरिका में पाकिस्तान की यह अभूतपूर्व लॉबिंग गतिविधि दक्षिण एशिया की बदलती कूटनीतिक वास्तविकताओं को उजागर करती है। यह प्रकरण दिखाता है कि आधुनिक भू-राजनीतिक संघर्ष केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सत्ता गलियारों में भी समानांतर रूप से लड़े जाते हैं। भारत की सख्त सैन्य और राजनीतिक नीति तथा पाकिस्तान की वैश्विक कूटनीतिक प्रतिक्रिया ने 2025 को भारत-पाक संबंधों के इतिहास में एक निर्णायक अध्याय बना दिया।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
