रेस्क्यू ऑपरेशन पर गहराया रहस्य; विशेषज्ञों का दावा- मिशन के पीछे छिपा है ट्रंप का कोई बड़ा प्लान
ईरान में अमेरिकी पायलट रेस्क्यू पर रक्षा विशेषज्ञों ने उठाए 5 गंभीर सवाल। क्या रेस्क्यू की आड़ में ट्रंप कोई बड़ा सैन्य ऑपरेशन छिपा रहे हैं? पूरी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट।

ईरान में दुर्घटनाग्रस्त हुए अमेरिकी विमान का मलबा और बचाव कार्य में शामिल सैन्य विमान; विशेषज्ञों ने इस मिशन की आधिकारिक थ्योरी पर संदेह व्यक्त किया है।
US F-15 crash Iran conspiracy : ईरान के आसमान में एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान के गिरने और उसके बाद शुरू हुए हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों में एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसकी परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं। व्हाइट हाउस और पेंटागन भले ही इसे एक जांबाज पायलट को बचाने का साहसी मानवीय मिशन करार दे रहे हों, लेकिन युद्ध के मैदान से छनकर आ रही जानकारियां कुछ और ही भयावह संकेत दे रही हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कोई ऐसा गुप्त सैन्य खेल छिपा हो सकता है, जिसे 'रेस्क्यू ऑपरेशन' का चोला पहनाकर दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों द्वारा उठाया गया सबसे पहला और गंभीर सवाल उन विशालकाय विमानों की मौजूदगी पर है, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर बड़े सैन्य अभियानों में होता है। एक या दो पायलटों को बचाने के लिए C-130 जैसे भारी-भरकम कार्गो विमानों की क्या आवश्यकता थी? यह विमान दर्जनों कमांडो और भारी रसद ले जाने की क्षमता रखता है। सैन्य विश्लेषकों का संदेह है कि खुज़ेस्तान के दुर्गम इलाकों में पहले से ही अमेरिका की कोई बड़ी स्पेशल ऑपरेशंस टीम या ग्राउंड फोर्स तैनात थी, जिसे अचानक बेपर्दा होने के बाद सुरक्षित बाहर निकालने के लिए इन विमानों को झोंका गया।
इस पूरे विवाद का केंद्र 'खुज़ेस्तान' क्षेत्र का होना भी एक गहरे रणनीतिक षड्यंत्र की ओर इशारा करता है। खुज़ेस्तान ईरान के तेल उत्पादन का मुख्य हृदय स्थल है। यहाँ अमेरिकी विमानों की लगातार आवाजाही और फिर एक लड़ाकू विमान का दुर्घटनाग्रस्त होना यह संभावना प्रबल करता है कि अमेरिका ईरान के तेल नेटवर्क पर कब्जा करने या उसे पंगु बनाने के लिए किसी गुप्त जमीनी अभियान पर काम कर रहा था। मुमकिन है कि दुर्घटनाग्रस्त F-15 उसी गुप्त बेस को हवाई सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा हो। आधिकारिक 'रेस्क्यू थ्योरी' में मौजूद विसंगतियां इस संदेह को और पुख्ता करती हैं। केवल एक पायलट के लिए तीन अत्याधुनिक विमानों और अरबों डॉलर के संसाधनों को दांव पर लगाना किसी भी तर्कसंगत सैन्य रणनीति का हिस्सा नहीं लगता।
मिशन के दौरान अचानक A-10 'वार्थोग' जैसे जमीनी हमलों के विशेषज्ञ विमानों का शामिल होना पेंटागन की किसी बड़ी 'घबराहट' भरी प्रतिक्रिया की ओर संकेत करता है। जानकारों का मानना है कि जब ईरानी सेना को पायलट की तलाश के बहाने उस गुप्त अमेरिकी बेस की भनक लगी, तब अमेरिका को अपने पूरे कवर को उजागर होने से बचाने के लिए भारी गोलाबारी और अतिरिक्त विमानों का सहारा लेना पड़ा। दूसरी ओर, ईरान द्वारा पायलट पर इनाम घोषित करना और स्थानीय आबादी को तलाशी अभियान में झोंकना भी एक सोची-समझी चाल थी ताकि वहां छिपी पूरी अमेरिकी टुकड़ी पर दबाव बनाया जा सके।
अंततः, यह घटना केवल एक विमान के गिरने या पायलट के बचने तक सीमित नहीं है। यह पश्चिम एशिया में छिड़े एक गुप्त और विनाशकारी युद्ध की वह झलक है, जो आने वाले समय में वैश्विक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है। यदि यह साबित होता है कि अमेरिका 'बचाव अभियान' की आड़ में ईरान की संप्रभुता के भीतर कोई बड़ा जमीनी हमला कर रहा था, तो यह न केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि एक ऐसे महायुद्ध का बिगुल भी फूंक सकता है जिसे रोकना शायद किसी के वश में न रहे।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
