Epstein Files scandal : अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी लाखों फाइलों के प्रकाशन ने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है। लेकिन यह पारदर्शिता का प्रयास उस समय एक भयावह त्रासदी में बदल गया, जब 'निजता की सुरक्षा' के दावों के बावजूद हजारों पन्नों में पीड़ितों के नाम, उनकी पहचान और यहाँ तक कि नग्न तस्वीरें बिना किसी संपादन के सार्वजनिक कर दी गईं। इस गंभीर लापरवाही के बाद विभाग को आनन-फानन में अपनी वेबसाइट से हजारों दस्तावेज वापस लेने पड़े हैं, जिसे पीड़ितों के वकीलों ने "इतिहास का सबसे जघन्य निजता उल्लंघन" करार दिया है।

न्याय के नाम पर निजता का चीरहरण :

अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी 2026 को लगभग 30 लाख फाइलें जारी की थीं। विभाग का दावा था कि 500 से अधिक वकीलों और विशेषज्ञों ने एक-एक पृष्ठ की बारीकी से जांच की है। इसके बावजूद, सार्वजनिक हुए दस्तावेजों में ऐसी सामग्री मिली जिसने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं:

  • पीड़ितों की पहचान उजागर : फाइलों में उन महिलाओं के वास्तविक नाम, जन्मतिथि और उनके स्कूलों के विवरण शामिल थे, जिन्होंने कभी अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर गवाही दी थी।
  • संवेदनशील दृश्य सामग्री : दस्तावेजों में किशोरियों और युवा महिलाओं की नग्न तस्वीरें बिना किसी संपादन (Redaction) के प्रकाशित कर दी गईं।
  • अपुष्ट राजनीतिक दावे : हटाए गए दस्तावेजों में वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ सनसनीखेज लेकिन अपुष्ट आरोप भी शामिल थे, जिन्हें विभाग ने "झूठा और चुनाव को प्रभावित करने वाला" बताया है।


वकीलों का आक्रोश और 'जेन डो' की पुकार :

पीड़ितों के वकीलों, ब्रिटनी हेंडरसन और ब्रैड एडवर्ड्स ने संघीय न्यायाधीशों को लिखे पत्र में विभाग की "संस्थागत अक्षमता" पर कड़ा प्रहार किया है। पत्र में उल्लेख किया गया कि एक पीड़िता, जिसे 'जेन डो 5' के नाम से जाना जाता है, ने व्यथित होकर कहा, "मैं कभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई, लेकिन अब मुझे मीडिया द्वारा परेशान किया जा रहा है। यह मेरे जीवन के लिए विनाशकारी है।"



आलोचकों और कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजॉम ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया है कि क्या यह केवल एक गलती थी या कुछ रसूखदारों को बचाने के लिए "चुनिंदा संपादन" की कोशिश? उन्होंने पूछा, "वे आखिर क्या छिपा रहे हैं?"

प्रशासनिक स्वीकारोक्ति और कानूनी संकट :

न्याय विभाग के प्रवक्ता ने स्वीकार किया है कि लगभग 0.1 प्रतिशत फाइलों (करीब 3,000 पन्ने) में संपादन की कमियाँ रह गई थीं। विभाग अब "चौबीसों घंटे" काम कर उसे सुधारने का दावा कर रहा है। हालांकि, कानूनी जानकारों का मानना है कि इस डेटा लीक ने न केवल पीड़ितों की सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि भविष्य की कानूनी गवाहियों की विश्वसनीयता पर भी चोट की है।





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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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