International Day of Older Persons के मौके पर बुजुर्गों के बार-बार गिरने को लेकर विशेषज्ञ ने महत्वपूर्ण कारण बताए हैं। घर में किसी बुजुर्ग के गिरने पर अक्सर यह मान लिया जाता है कि बढ़ती उम्र या शरीर में कमजोरी के कारण ऐसा हुआ होगा, लेकिन हर बार इसकी वजह कमजोरी नहीं होती। कई बार नजर कमजोर होना, ब्लड प्रेशर की समस्या या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी संतुलन बिगड़ने और गिरने का कारण बन सकती हैं।

Delhi के ISIC Multispeciality Hospital की Internal Medicine की Senior Consultant Dr. Vineeta Singh Tandon के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। National Institute on Aging (NIA) और Dr. Vineeta Singh Tandon के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम हो सकती है और शरीर का संतुलन बनाए रखने में परेशानी हो सकती है। कई मामलों में बुजुर्ग कुछ बीमारियों की रेगुलर दवाएं लेते हैं, जिनसे समय के साथ कमजोरी या चक्कर आ सकते हैं। इसलिए अगर कोई बुजुर्ग बार-बार गिर रहा है, तो इसे केवल उम्र से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए और इसके कारणों को जानना जरूरी है।

Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि बुजुर्गों के बार-बार गिरने से हड्डी टूटने, सिर में चोट लगने या अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ सकती है। कई बार बुजुर्ग गिरने के बाद दोबारा चलने या वॉक पर जाने से डरने लगते हैं। ऐसे में गिरने के कारणों को समझना जरूरी है।

उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की कमजोरी बार-बार गिरने का एक कारण हो सकती है। शरीर की ताकत कम होने पर पैरों की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं, जिससे चलने, उठने-बैठने और शरीर का संतुलन बनाए रखने में परेशानी हो सकती है।

नजर कमजोर होना भी बुजुर्गों में संतुलन बिगड़ने का कारण बन सकता है। उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद या आंखों की दूसरी समस्याओं के कारण सीढ़ियां, फर्श पर रखी चीजें या ऊबड़-खाबड़ रास्ते ठीक से दिखाई नहीं देने पर गिरने की स्थिति बन सकती है।

लेटने या लंबे समय तक बैठने के बाद अचानक खड़े होने पर कई बुजुर्गों को चक्कर आने लगते हैं। इसकी वजह ब्लड प्रेशर का अचानक कम होना हो सकता है। इसलिए लेटने के बाद कुछ समय के लिए बैठना चाहिए।

दवाओं का असर भी संतुलन बिगाड़ सकता है। ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर कम या ज्यादा होने के कारण बुजुर्गों को नींद आने, चक्कर या कमजोरी की समस्या हो सकती है। हालांकि, ऐसी स्थिति में खुद से दवा बंद नहीं करनी चाहिए, बल्कि डॉक्टर से सलाह लेकर दवा में बदलाव किया जा सकता है।

कान की अंदरूनी समस्या भी गिरने का कारण बन सकती है। शरीर का संतुलन बनाए रखने में कान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कान में अंदरूनी समस्या होने पर चलते समय चक्कर आ सकते हैं, जिससे गिरने का खतरा बढ़ सकता है।

गठिया और जोड़ों का दर्द भी बुजुर्गों के लिए सामान्य रूप से चलना मुश्किल बना सकता है। उम्र बढ़ने के साथ घुटनों, कूल्हों या टखनों में दर्द होने पर पैर लड़खड़ा सकता है और गिरने की स्थिति बन सकती है।

विटामिन D की कमी भी हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती को प्रभावित कर सकती है। विटामिन D शरीर की हड्डियों और मांसपेशियों के लिए बहुत जरूरी है। इसकी कमी होने पर बुजुर्गों के गिरने की संभावना बढ़ सकती है।

Dr. Vineeta Singh Tandon ने बताया कि अगर कोई बुजुर्ग बार-बार गिरता है, तो बार-बार चक्कर आने, चलते समय शरीर का संतुलन बिगड़ने, थोड़े समय के अंदर एक से ज्यादा बार गिरने, कुर्सी से उठने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी और दोबारा गिरने का लगातार डर बने रहने जैसे लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए।

National Institute on Aging (NIA) के मुताबिक, बुजुर्गों के गिरने की संभावना कम करने के लिए रोजाना टहलने या सीढ़ियां चढ़ने जैसी कसरत करके ओस्टियोपोरोसिस से बचा जा सकता है। योग या वजन उठाने जैसी एक्सरसाइज से संतुलन और मांसपेशियों की ताकत में सुधार हो सकता है।

अगर देखने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से मोतियाबिंद या आंखों से जुड़ी समस्याओं की जांच करानी चाहिए। सुनने में दिक्कत होने पर भी गिरकर चोट लग सकती है, इसलिए कानों का चेकअप कराना जरूरी है। किसी दवा से साइड इफेक्ट हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। पर्याप्त मात्रा में नींद पूरी करने से शरीर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

लेटने या बैठने के बाद बहुत तेजी से खड़े होने पर संतुलन बिगड़ सकता है। अगर गिरने की समस्या बार-बार हो रही है, तो वॉकर के सहारे चलना चाहिए। अच्छी ग्रिप वाले जूते या चप्पल पहनने की सलाह भी दी गई है।

पार्किंसंस में मांसपेशियों में अकड़न, हाथों में कंपन और छोटे-छोटे कदम उठाकर चलने की समस्या होती है। डिमेंशिया में दिमाग दूरी और सतह की ढलान का सही अंदाजा नहीं लगा पाता, जिससे संतुलन बिगड़ सकता है।

गिरने के बाद बुजुर्ग को तुरंत दर्द महसूस न हो, तब भी डॉक्टरी जांच जरूरी है। बुजुर्गों में हड्डियां कमजोर होने के कारण हेयरलाइन या हिप फ्रैक्चर और सिर में अंदरूनी ब्लीडिंग के लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते। इसलिए गिरने के बाद मेडिकल स्कैन और चेकअप कराना बहुत जरूरी है।

अगर बुजुर्ग बार-बार गिर रहे हैं, तो इसे सिर्फ कमजोरी नहीं मानना चाहिए। इसके पीछे ब्लड प्रेशर का कम होना, कान या आंख की परेशानी, जोड़ों में दर्द या विटामिन की कमी हो सकती है। कारणों की समय पर पहचान बुजुर्गों को गिरने से होने वाली चोट और उसके बाद पैदा होने वाली परेशानियों से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

यह जानकारी Aneesh Rawat ने प्रकाशित की है। वह पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। लेख Dr Vineeta Singh Tandon द्वारा मेडिकल रूप से रिव्यू किया गया है।

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है, हालांकि इसकी नैतिक जिम्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है। उद्देश्य जानकारी उपलब्ध कराना मात्र है।

Pratahkal Bureau

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