Trump criticism of Pope Leo XIV : दुनिया की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक शख्सियत और कैथोलिक ईसाई जगत के सर्वोच्च धर्मगुरु के बीच एक ऐसा टकराव शुरू हो गया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी पोस्ट और जॉइंट बेस एंड्रयूज से दिए गए एक कड़े संबोधन में अमेरिकी मूल के पोप लियो चौदहवें पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने न केवल पोप की युद्ध विरोधी नीतियों की आलोचना की, बल्कि उन पर 'अपराध और पाखंड' को नजरअंदाज करने का आरोप लगाकर वैश्विक कूटनीति और धार्मिक हलकों में खलबली मचा दी है। यह विवाद इसलिए भी गहरा है क्योंकि पोप लियो, जो पहले शिकागो के कार्डिनल रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट थे, अमेरिका के पहले ऐसे नागरिक हैं जो वेटिकन की इस सर्वोच्च गद्दी पर आसीन हुए हैं।

विवाद की मुख्य जड़ ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य धमकियों का पोप द्वारा विरोध किया जाना है। ट्रंप ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि एक तरफ पोप ईरान के प्रति अमेरिकी आक्रामकता का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वे उन चर्च नेताओं के प्रति मौन रहे जिन्हें कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। ट्रंप ने तंज कसते हुए दावा किया कि लियो के 2025 में पोप चुने जाने के पीछे उनका हाथ था, लेकिन अब वही वेटिकन अमेरिकी हितों के खिलाफ खड़ा है। इस दौरान ट्रंप ने पोप के भाई लुई प्रीवोस्ट, जो ट्रंप के प्रबल समर्थक हैं, की प्रशंसा कर वेटिकन के भीतर भी वैचारिक दरार को हवा देने की कोशिश की है। साथ ही, उन्होंने वेनेजुएला के निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए किए गए सैन्य हमलों का बचाव करते हुए अपनी आक्रामक विदेश नीति का लोहा मनवाया।


कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से यह विवाद तब और अधिक गंभीर हो गया जब कुछ घंटों बाद ट्रंप ने एक एआई-जनरेटेड (AI) तस्वीर साझा की, जिसमें उनके चेहरे के पीछे ईसा मसीह जैसा तेज (ऑरा) दिखाया गया था। जहाँ ट्रंप के कट्टर समर्थकों ने इसे 'ईश्वरीय न्याय' करार दिया, वहीं कैथोलिक समुदायों और धार्मिक संगठनों ने इसे ईशनिंदा (Blasphemy) बताया है। आश्चर्यजनक रूप से, दक्षिणपंथी नेता मार्जोरी टेलर ग्रीन जैसे उनके अपने सहयोगियों ने भी इस चित्रण पर सवाल उठाए हैं। वेटिकन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने अमेरिका में रहने वाले करोड़ों कैथोलिक मतदाताओं के बीच एक असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।


इस अभूतपूर्व संघर्ष का अंत क्या होगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन ट्रंप के इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी सत्ता के सामने किसी भी वैश्विक संस्था या धार्मिक नेतृत्व की चुनौती स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। धार्मिक आस्था और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के इस टकराव ने न केवल अमेरिका के घरेलू चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया है, बल्कि वेटिकन और वाशिंगटन के बीच के कूटनीतिक संबंधों को एक ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ से वापसी का रास्ता फिलहाल बेहद कठिन नजर आता है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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