मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना ने म्यमेन्सिंग जिले को हिला कर रख दिया है। हिंदू फैक्ट्री मजदूर दीपु चंद्र दास की हिंसक हत्या और उसकी आग में जलाए जाने की खबर ने पूरे देश में गहरी चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि पुलिस ने मृतक को कट्टरपंथी हमलावरों के हवाले कर दिया।

घटना 18 दिसंबर 2025 की है, जब दीपु चंद्र दास अपने कार्यस्थल के पास ही एक भीड़ द्वारा हमला किए जाने के बाद क्रूर रूप से पीटे गए। आरोप है कि उन्हें ब्लैस्फेमी यानी धर्म का अपमान करने का आरोप लगाया गया था। घटना स्थल पर भीड़ ने उन्हें पकड़कर एक पेड़ से बांध दिया और बाद में आग लगा दी। वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में दिखाया गया कि मृतक बार-बार मदद के लिए पुकार रहा था, कह रहा था, "सर, मैं निर्दोष हूँ। मैं कुछ गलत नहीं किया।"


सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि पुलिस ने उसके बार-बार के कराहने और मदद के लिए पुकारने के बावजूद उसे कट्टरपंथी हमलावरों के हवाले कर दिया। पोस्ट में लिखा गया, "दीपु चंद्र दास बार-बार रोता रहा और मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन बांग्लादेश पुलिस ने उसे कट्टरपंथी मुसलमानों के हवाले कर दिया। जो कुछ उसके साथ हुआ, वह पूरी मानवता के लिए शर्मनाक है।"


अधिकारिक रिपोर्ट और पुलिस के बयान के अनुसार, यह दावा पूरी तरह सत्यापित नहीं है। पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) को घटना स्थल पर बुलाया गया था, लेकिन भीड़ और ट्रैफिक के कारण उनकी पहुँच तब तक नहीं हो सकी जब तक हिंसा बढ़ चुकी थी। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने और हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रयास किया, न कि किसी तरह से मृतक को उनके हवाले करने का आदेश दिया।


घटना के बाद, पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मामले की गहन जांच जारी है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्ट ने कई लोगों में यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या पुलिस ने वास्तव में किसी तरह की लापरवाही की, या क्या यह सिर्फ अफवाह और भावनात्मक प्रतिक्रिया का परिणाम है।

मामले की जांच में यह ध्यान रखा जा रहा है कि हिंसा के पीछे धार्मिक उकसाने और अफवाहों की भूमिका कितनी रही। पुलिस और सुरक्षा बलों के बयान के अनुसार, उन्हें घटना स्थल पर पहुँचने में तकनीकी और भीड़-नियंत्रण की बाधाओं का सामना करना पड़ा। वहीं, आरोपी हमलावरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और अदालतों में मामला दर्ज किया गया है।

दीपु चंद्र दास की हत्या ने न केवल बांग्लादेश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता और गहरा आक्रोश पैदा किया है। यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि अफवाह और धार्मिक उकसावे किस प्रकार निर्दोष जीवन के लिए घातक साबित हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने सत्य और अफवाह के बीच की जटिलता को उजागर किया है और कानून व्यवस्था के प्रति नागरिकों के विश्वास को चुनौती दी है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मदद के लिए पुकार रहा व्यक्ति दीपु चंद्र दास हैं। हम इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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