ढाका की एक विशेष अदालत में सोमवार का दिन बांग्लादेश की राजनीतिक इतिहास में एक निर्णायक मोड़ बन गया, जब अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को “मानवता के विरुद्ध अपराध” का दोषी ठहराते हुए मौत की सज़ा सुना दी। यह वही मामले हैं, जिनमें पिछले वर्ष छात्र-नेतृत्व वाले व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, गोलीबारी और मौतों को लेकर उन्हें आरोपी बनाया गया था—अशांति जिसने उनकी अवामी लीग सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया और उन्हें भारत में निर्वासन में रहने पर मजबूर कर दिया।

78 वर्षीय हसीना की अनुपस्थिति में सुनाया गया यह फैसला बांग्लादेश के हालिया दशकों में किसी शीर्ष राजनीतिक नेता के खिलाफ सबसे नाटकीय और कठोर कार्रवाई मानी जा रही है। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि छात्र आंदोलन पर की गई हिंसक कार्रवाई के पीछे “मास्टरमाइंड” स्वयं तत्कालीन प्रधानमंत्री हसीना थीं, और उनकी जानकारी व निर्देश पर ही पुलिस ने घातक बल प्रयोग किया था।

न्यायमूर्ति मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मजूमदार की अगुवाई वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में कहा कि पांच अगस्त को ढाका के चंखरपुल इलाके में छह प्रदर्शनकारियों की हत्या “सीधे प्रधानमंत्री के आदेश और उनकी जानकारी में” हुई। अदालत ने इन्हीं आधारों पर हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए आजीवन कारावास तथा अलग से कई हत्याओं की जिम्मेदारी के लिए मृत्युदंड की सज़ा सुनाई।

फैसले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मौत की सज़ा दी गई है, जबकि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पाँच वर्ष की जेल की सज़ा सुनाई गई। अदालत ने आदेश दिया कि हसीना और कमाल की संपत्तियां जब्त कर राज्य के हवाले की जाएं।

मामले की जाँच कई महीनों तक चली। इस दौरान न्यायाधिकरण ने बार-बार भारत स्थित हसीना को ढाका लौटने और अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए, पर उन्होंने सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया पर भरोसे की कमी का हवाला देते हुए लौटने से इनकार कर दिया। उनके अनुसार, यह मुकदमा राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम है और विपक्षी शक्तियों द्वारा संचालित “पक्षपातपूर्ण कार्रवाई” है।

बांग्लादेश में सुरक्षा हालात फैसले से पहले ही बेहद तनावपूर्ण हो चुके थे। रविवार को ढाका पुलिस आयुक्त ने आगजनी, विस्फोट या हिंसक गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को “देखते ही गोली मारने” का आदेश जारी किया था। फैसले से एक दिन पहले राजधानी में हसीना के समर्थन में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें कई स्थानों पर देसी बम धमाकों की आवाज़ सुनी गई। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन शहर का माहौल गहरे डर और अनिश्चितता में डूब गया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट बताती है कि “जुलाई विद्रोह” के दौरान 15 जुलाई से 15 अगस्त के बीच करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में चल रहे मुकदमे ने बांग्लादेश की राजनीति को एक बार फिर भारी उथल-पुथल में झोंक दिया है, जबकि अंतरिम सरकार न्यायिक प्रक्रिया को “कानूनी आवश्यकता” बताती है।

ढाका का यह फैसला न केवल बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य पर गहरा प्रभाव छोड़ने वाला है, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति, सुरक्षा और चुनावी माहौल को भी नए सिरे से बदलने की क्षमता रखता है। अब दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हसीना के खिलाफ यह ऐतिहासिक फैसले देश को स्थिरता की ओर ले जाएगा या और अधिक अस्थिरता की ओर धकेलेगा।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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