ईरान युद्ध के बीच DGCA का फरमान; अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जाने क्या है नए नियम ?
ईरान युद्ध के चलते DGCA ने पायलटों के ड्यूटी टाइम नियमों में दी राहत। लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बढ़ा समय। सुरक्षा और थकान प्रबंधन पर कड़ी निगरानी के निर्देश।

ईरान युद्ध के चलते DGCA ने पायलटों के ड्यूटी टाइम नियमों में दी राहत। लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए बढ़ा समय। सुरक्षा और थकान प्रबंधन पर कड़ी निगरानी के निर्देश।
DGCA relaxes pilot duty time limits due to Iran war : पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान के हवाई क्षेत्र (Airspace) के बंद होने से वैश्विक विमानन क्षेत्र में एक अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया है। इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब भारतीय अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी दिखने लगा है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लेते हुए लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए पायलटों के 'ड्यूटी टाइम लिमिट' (FDTL) नियमों में अस्थायी रूप से ढील देने की घोषणा की है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि युद्धग्रस्त क्षेत्रों से बचकर निकलने के लिए विमानों को अब लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे उड़ानों के समय में भारी वृद्धि हुई है और एयरलाइंस के लिए मौजूदा सख्त नियमों का पालन करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण पश्चिमी देशों की ओर जाने वाली उड़ानों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों का चयन करना पड़ रहा है। इस परिस्थिति में, दो पायलटों वाली लंबी दूरी की उड़ानों के लिए 'फ्लाइट टाइम' (FT) को 1 घंटा 30 मिनट बढ़ाकर अब 11 घंटे 30 मिनट कर दिया गया है। इसी तरह, 'फ्लाइट ड्यूटी पीरियड' (FDP) में भी 1 घंटा 45 मिनट का विस्तार किया गया है, जिससे अब यह समय सीमा बढ़कर 11 घंटे 45 मिनट हो गई है। यह संशोधन उन एयरलाइंस को बड़ी राहत प्रदान करेगा जो पिछले साल लागू किए गए थकान प्रबंधन (Fatigue Management) के कड़े नियमों के कारण परिचालन में कठिनाइयों का सामना कर रही थीं।
विदित हो कि डीजीसीए ने पिछले वर्ष पायलटों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए विश्राम की अवधि को 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया था। हालांकि, युद्ध की आपातकालीन स्थिति ने इन सुरक्षा मानकों और परिचालन की निरंतरता के बीच एक नया संतुलन बनाने की आवश्यकता पैदा कर दी है। नए निर्देशों के तहत, 'फ्लाइंग टाइम' की गणना अब विमान के रनवे पर चलने से लेकर गंतव्य पर पूरी तरह रुकने तक की जाएगी। नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों में दी गई इस राहत का दुरुपयोग न हो, इसके लिए एयरलाइंस की साप्ताहिक और पाक्षिक आधार पर कड़ी निगरानी की जाएगी। डीजीसीए के अधिकारी हर दो महीने में एयरलाइंस का औचक निरीक्षण करेंगे ताकि सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता न हो।
अंततः, डीजीसीए का यह निर्णय युद्ध काल में विमानन उद्योग को चालू रखने के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। रेगुलेटर अब एयरलाइंस के पायलट रोस्टर, क्रू की उपलब्धता और बैकअप व्यवस्थाओं पर सूक्ष्म नजर रख रहा है। जहां एक ओर यह छूट एयरलाइंस को परिचालन की सुविधा प्रदान करती है, वहीं दूसरी ओर यह पायलटों की कार्यक्षमता और विमान की सुरक्षा पर एक बड़ा दायित्व भी डालती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पश्चिम एशिया का तनाव कब तक शांत होता है, क्योंकि लंबी अवधि तक पायलटों के कार्यभार में यह वृद्धि विमानन सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक नई बहस को जन्म दे सकती है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
