कोलंबो: श्रीलंका ने हाल ही में साइक्लोन डिटवा की भीषण चपेट का सामना किया, जिसने देश के जीवन और ढांचे को तहस-नहस कर दिया। भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ ने न केवल घरों और सड़कों को क्षतिग्रस्त किया, बल्कि कई इलाकों में लोगों को फंसा दिया। अब तक इस भयंकर तूफान में 123 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 130 से अधिक लोग लापता हैं, और राहत एवं बचाव कार्य जारी है।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शुरू में मौतों की संख्या कम थी और केवल कुछ लोग लापता बताए गए थे। लेकिन जैसे-जैसे राहत दलों ने भूस्खलन और बाढ़ से प्रभावित दूरदराज इलाकों तक पहुँच बनाई, मौतों और लापता लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई। वर्तमान में मृतकों का आंकड़ा 123 तक पहुंच गया है और 130 से अधिक लोग अब भी खोजे जा रहे हैं।


सबसे अधिक प्रभाव पहाड़ी और चाय-बागानों वाले क्षेत्रों में देखा गया। Kandy District में 51 लोगों की जानें गईं, जबकि Badulla District में 35 मौतें हुई हैं। इसके अलावा Kegalle, Matale, Nuwara Eliya और Ampara जिलों में भी भारी नुकसान हुआ। अनुमान है कि लगभग 15,000 घर नष्ट हो गए और करीब 44,000 लोग अस्थायी आश्रयों में शरणार्थी बने हुए हैं।


आपदा के बाद श्रीलंकाई सरकार ने राहत और बचाव कार्यों को गति दी। सेना, नौसेना और वायुसेना को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया। अस्थायी आश्रयों में विस्थापितों को सुरक्षित रखा गया और जीवन-यापन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए। अंतरराष्ट्रीय सहायता की गुहार लगाई गई और कई देशों ने राहत सामग्री भेजी। राहत दलों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी बचाव कार्य जारी रखे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।


आरंभिक रिपोर्टों में कम मृतकों और लापता लोगों का अनुमान था, क्योंकि राहत और बचाव कार्य तब केवल शहरी या सुलभ इलाकों तक ही सीमित थे। जैसे-जैसे दुर्गम और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच बनी, मृतकों और लापता लोगों की संख्या में वृद्धि हुई। नदी किनारे, पहाड़ और अन्य कठिन इलाके राहत कार्य की गति को धीमा कर रहे थे, जिससे प्रारंभिक आंकड़ों में निरंतर संशोधन करना पड़ा।


साइक्लोन डिटवा ने श्रीलंका को न केवल भौतिक रूप से बल्कि मानवीय दृष्टि से भी गहरा झटका दिया। हजारों घर ध्वस्त, लाखों लोग विस्थापित और सैकड़ों जीवन तबाह हो गए। यह आपदा जलवायु परिवर्तन और कमजोर अवसंरचना की चेतावनी भी है। भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी और आपदा प्रबंधन की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story