शक्सगाम में CPEC का बहाना और भारत पर निशाना ; क्या है चीन-पाकिस्तान के खूनी गठजोड़ का असली सच?
शक्सगाम घाटी को लेकर चीन ने भारत के दावे को सिरे से खारिज करते हुए क्षेत्र को अपनी संप्रभु भूमि बताया है। चीन–पाकिस्तान सीमा समझौते और सीपीईसी परियोजनाओं के हवाले से दिए गए इस बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक तनाव और गहराने की आशंका है।

शक्सगाम वैली
एशिया की संवेदनशील भौगोलिक और राजनीतिक संरचना में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कश्मीर से जुड़ी शक्सगाम घाटी को लेकर चीन और भारत के बीच नया कूटनीतिक टकराव सामने आया है। चीन ने स्पष्ट शब्दों में भारत के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि शक्सगाम घाटी उसकी संप्रभु सीमा का हिस्सा है और वहां किया जा रहा बुनियादी ढांचा निर्माण पूरी तरह वैध है। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्रीय संतुलन पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
चीन के अनुसार, शक्सगाम घाटी में किए जा रहे निर्माण कार्य उसकी अपनी भूमि पर हो रहे हैं और इस पर किसी अन्य देश की आपत्ति को वह स्वीकार नहीं करता। बीजिंग का कहना है कि यह गतिविधियां उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के दायरे में आती हैं। साथ ही चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में चल रही परियोजनाएं चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से जुड़ी हैं, जिन्हें वह क्षेत्रीय विकास और संपर्क का महत्वपूर्ण आधार मानता है।
Breaking: China rejects India's claim to Shaksgam Valley in Kashmir
— Shashank Mattoo (@MattooShashank) January 13, 2026
"The territory you mentioned belongs to China. It’s fully justified for China to conduct infrastructure construction on its own territory," says China's Foreign Ministry pic.twitter.com/CMmyWvK4z5
चीन ने अपने रुख को कानूनी आधार देते हुए 1963 में हुए चीन–पाकिस्तान सीमा समझौते का हवाला दिया। उसके अनुसार, इस समझौते के तहत शक्सगाम घाटी चीन को सौंपी गई थी और यह समझौता आज भी वैध है। बीजिंग का यह भी कहना है कि इस समझौते का कश्मीर विवाद के अंतिम समाधान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, क्योंकि यह एक अलग द्विपक्षीय सीमा व्यवस्था थी। चीन का दावा है कि इस समझौते को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध माना जा सकता है।
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा ऐतराज जताया है। नई दिल्ली का कहना है कि शक्सगाम घाटी ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर का हिस्सा रही है और इस पर भारत का वैध दावा है। भारत ने कभी भी 1963 के चीन–पाकिस्तान सीमा समझौते को मान्यता नहीं दी है और उसे अवैध करार दिया है। भारतीय पक्ष के अनुसार, किसी तीसरे पक्ष को ऐसे क्षेत्र पर समझौता करने का अधिकार नहीं है, जिस पर उसका स्वयं का कानूनी अधिकार नहीं हो।
भारतीय अधिकारियों ने यह भी दोहराया है कि शक्सगाम घाटी सहित जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी क्षेत्र भारत की संप्रभु सीमा का अभिन्न अंग हैं। भारत का मानना है कि इस इलाके में बाहरी गतिविधियां न केवल उसके क्षेत्रीय दावों को चुनौती देती हैं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
भौगोलिक दृष्टि से शक्सगाम घाटी काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में स्थित एक दुर्गम लेकिन रणनीतिक क्षेत्र है। यह इलाका चीन के शिनजियांग क्षेत्र और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान से सटा हुआ है। इसी वजह से यह क्षेत्र लंबे समय से तीन देशों के हितों के टकराव का केंद्र बना हुआ है।
वर्तमान घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय सामने आया है जब एशिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। शक्सगाम घाटी को लेकर चीन का आक्रामक रुख और भारत की कड़ी आपत्ति आने वाले समय में द्विपक्षीय और क्षेत्रीय संबंधों पर गहरा असर डाल सकती है। यह विवाद न केवल सीमाओं का प्रश्न है, बल्कि एशिया की रणनीतिक स्थिरता और कूटनीतिक संतुलन की भी एक बड़ी परीक्षा बनकर उभरा है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
