WHO ने जारी की बड़ी चेतावनी ; अनुमान से कई गुना तेजी से फैल रहा इबोला वायरस
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। WHO ने चेतावनी दी है कि संक्रमण अनुमान से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रहा है। दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन, वैक्सीन की कमी और युगांडा तक पहुंचे संक्रमण ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप
अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में फैला इबोला वायरस अब भयावह रूप लेता दिखाई दे रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यह प्रकोप शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक तेजी से फैल सकता है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि संक्रमण कई सप्ताह तक बिना पहचान के फैलता रहा, जिससे अब इसे नियंत्रित करना स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। तेजी से बढ़ते मामलों और मौतों ने पूरे मध्य अफ्रीकी क्षेत्र में चिंता की लहर पैदा कर दी है।
WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने इस महामारी की “रफ्तार और व्यापकता” को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संघर्ष प्रभावित इलाकों में संक्रमित लोगों की पहचान और संपर्कों का पता लगाना बेहद कठिन हो गया है। स्थिति को और गंभीर इस वजह से भी माना जा रहा है क्योंकि स्वास्थ्यकर्मी भी वायरस की चपेट में आ चुके हैं।
कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर कंबा के अनुसार देश में अब तक 513 संदिग्ध मामले और 131 मौतें दर्ज की गई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इन मौतों की जांच जारी है ताकि यह तय किया जा सके कि कितनी मौतें वास्तव में इबोला संक्रमण से जुड़ी हैं। यह आंकड़े एक दिन पहले सामने आए 300 संदिग्ध मामलों की तुलना में बेहद तेज वृद्धि दर्शाते हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और राहतकर्मियों का कहना है कि वायरस कम से कम कई सप्ताह तक बिना पकड़े फैलता रहा। शुरुआती मरीज की मौत के बाद भी संक्रमण की सही पहचान नहीं हो सकी। गलत निगेटिव रिपोर्ट और देरी से हुए परीक्षणों ने हालात को और जटिल बना दिया। अब तक संक्रमण बुनीय, गोमा, मोंगबवालू, बुटेम्बो और न्याकुंडे जैसे इलाकों में पुष्टि के साथ सामने आ चुका है। इनमें गोमा विशेष रूप से संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह उत्तर किवु प्रांत का विद्रोहियों के नियंत्रण वाला प्रमुख शहर है।
इस बार का संक्रमण इबोला के दुर्लभ “बुंडिबुग्यो” स्ट्रेन से जुड़ा है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां इसे बेहद खतरनाक मान रही हैं। संक्रमण अब सीमाओं को पार करते हुए पड़ोसी देश युगांडा तक पहुंच चुका है, जहां कांगो से यात्रा कर आए लोगों में एक संक्रमित मामला और एक मौत दर्ज की गई है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO ने इस प्रकोप को “अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” घोषित कर दिया है। संगठन ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त चिकित्सा सामग्री, आपातकालीन फंडिंग और विशेषज्ञ टीमों को भेजना शुरू कर दिया है। हालांकि संघर्षग्रस्त इलाकों में असुरक्षा और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण राहत कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।
कांगो में इबोला का यह नया संकट केवल एक देश तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि यह पूरे अफ्रीकी क्षेत्र और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी बन चुका है। यदि संक्रमण की श्रृंखला को जल्द नहीं रोका गया, तो यह महामारी आने वाले दिनों में और व्यापक मानवीय संकट का रूप ले सकती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
