दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक, दक्षिण चीन सागर, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय विवादों के केंद्र में आ गया है, जहां चीन ने अपनी सैन्य ताकत का आक्रामक प्रदर्शन करते हुए पहली बार बॉम्बर विमानों के फॉर्मेशन में गश्त की है। यह कदम फिलीपींस, अमेरिका और जापान के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, जो क्षेत्रीय प्रभुत्व की जंग को और तेज करने का संकेत देता है।


यह घटना हाल ही में फिलीपींस द्वारा जापान और अमेरिका की नौसेनाओं के साथ संयुक्त गश्त के ठीक बाद हुई है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सदर्न थिएटर कमांड ने इस गश्त को फिलीपींस की 'भड़काऊ गतिविधियों' का जवाब बताया है। कमांड के प्रवक्ता सीनियर कर्नल तियान जुनली ने फिलीपींस को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे तुरंत बाहरी देशों के साथ संयुक्त गश्त बंद करनी चाहिए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम होंगे। पीएलए ने कहा कि उनके बॉम्बर विमानों ने सामूहिक ताकत का प्रदर्शन किया, जो सतही जहाजों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।


दक्षिण चीन सागर का अधिकांश हिस्सा चीन अपना मानता है, जहां उसका फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान के साथ लंबे समय से समुद्री विवाद चल रहा है। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से सालाना अरबों डॉलर का व्यापार गुजरता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के अनुसार, इन दावों पर विवाद है, और हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने 2016 में फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिसे चीन ने अस्वीकार कर दिया। हाल के महीनों में चीन और फिलीपींस के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां दोनों देशों के नौसेना और तटररक्षक जहाज बार-बार आमने-सामने आ चुके हैं, अपने-अपने दावेदार क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश में। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की यह बॉम्बर गश्त पीएलए की क्षमता और क्षेत्रीय प्रभुत्व को प्रदर्शित करने का एक रणनीतिक कदम है, जो सशस्त्र संघर्ष की संभावना को बढ़ाता है।


इस बीच, चीन और जापान के बीच भी तनाव नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने हाल ही में बयान दिया कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानेगा और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। टोक्यो की रिपोर्टों के मुताबिक, ताकाइची की लोकप्रियता 69.9 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जबकि 60.4 प्रतिशत लोग जापान के रक्षा खर्च को बढ़ाने के पक्ष में हैं और 48.8 प्रतिशत सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हैं। चीन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जापान के किसी भी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब दिया जाएगा। पीएलए के आधिकारिक अखबार पीएलए डेली ने लिखा कि जापान की गलत नीतियां पूरे देश को युद्धभूमि में बदल सकती हैं। इसके अलावा, चीन ने शुक्रवार को जापान के लिए कड़ी यात्रा सलाह जारी की, जिसमें अपने नागरिकों को जापान की यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है।


यह घटनाक्रम एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को रेखांकित करता है, जहां महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डाल रही है। यदि ये विवाद अनियंत्रित रहे, तो यह न केवल क्षेत्रीय शांति को भंग कर सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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