वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल सौदे का अंतिम चरण, रक्षा निर्यात में भारत की बड़ी बढ़त
वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल सौंपने के करीब भारत, रक्षा निर्यात में बढ़े कदम। नागपुर में ब्रह्मोस प्रमुख ने स्वदेशी बूस्टर की सफलता और भविष्य की नई योजनाओं का किया खुलासा। क्या वियतनाम के साथ होगा यह बड़ा रक्षा सौदा? जानें पूरी खबर।

ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्रमुख जयनितीर्थ जोशी नागपुर में ब्रह्मोस मिसाइल के स्वदेशी बूस्टर के 100वें निर्माण और वियतनाम को निर्यात की योजना पर बात करते हुए।
नागपुर में एक महत्वपूर्ण रक्षा कार्यक्रम के दौरान ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख जयनितीर्थ जोशी ने भारत की रक्षा कूटनीति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि की घोषणा की। उन्होंने बताया कि वियतनाम के साथ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' के निर्यात को लेकर बातचीत अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और मात्र कुछ तकनीकी औपचारिकताओं के बाद इस ऐतिहासिक सौदे को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी रक्षा निर्यात क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
इस कार्यक्रम के दौरान नागपुर स्थित सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड द्वारा निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल के 100वें स्वदेशी बूस्टर को हरी झंडी दिखाई गई, जो भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल की सफलता का प्रमाण है। जयनितीर्थ जोशी ने स्पष्ट किया कि वियतनाम के अलावा, पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों के कई अन्य देशों के साथ भी संभावित निर्यात को लेकर चर्चा चल रही है, जिसके परिणाम सरकार की औपचारिक मंजूरी के बाद सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने यह भी साझा किया कि ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली में वैल्यू इंजीनियरिंग के माध्यम से पिछले डेढ़ वर्षों में कच्चे माल की लागत में लगभग 24 प्रतिशत और विनिर्माण लागत में 10 प्रतिशत तक की कमी लाई गई है, जिससे भारतीय घटकों की लागत आने वाले समय में और कम होने की उम्मीद है।
मिसाइल की तकनीकी प्रगति पर बात करते हुए जोशी ने बताया कि भविष्य में ब्रह्मोस-एनजी और विस्तारित रेंज वाले संस्करणों पर अनुसंधान जारी है, जिसमें उन्नत कंपोजिट सामग्रियों का उपयोग कर मिसाइल को और अधिक हल्का और घातक बनाया जाएगा। हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ब्रह्मोस के सफल लाइव परीक्षण ने इसकी मारक क्षमता को सिद्ध किया है। भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के एनपीओ मैशिनोस्ट्रोयेनिया (NPOM) का यह संयुक्त उपक्रम अब स्वदेशीकरण के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। जल्द ही मिसाइल में प्रयुक्त आयातित वारहेड्स को भी पूरी तरह से स्वदेशी वारहेड्स से बदल दिया जाएगा, जिससे भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता और अधिक सुदृढ़ होगी।

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