11 साल की उम्र में रचा इतिहास ; जानिए बोधना शिवानंदन के 'नंबर 1' बनने की अद्भुत कहानी
11 वर्षीय भारतीय मूल की बोधना शिवानंदन ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ की रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल कर इंग्लैंड की नंबर 1 महिला खिलाड़ी बनने का गौरव पाया है।

पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन
केवल 11 वर्ष की आयु में भारतीय मूल की शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन ने इंग्लैंड की महिला शतरंज रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त कर विश्व भर के शतरंज प्रेमियों का ध्यान आकर्षित कर लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बोधना को सार्वजनिक रूप से बधाई दी और उनके खेल कौशल की प्रशंसा की। सुनेक ने अपने संदेश में साझा किया कि बोधना की सफलता “आश्चर्यजनक नहीं” है, और याद दिलाया कि उन्होंने कभी डाउनिंग स्ट्रीट के बाग में बोधना के साथ शतरंज खेला था।
बोधना, जो हार्रो, उत्तर लंदन की निवासी हैं, ने अंतर्राष्ट्रीय शतरंज महासंघ (FIDE) की रैंकिंग में 2366 अंकों के साथ इंग्लैंड की नंबर 1 महिला खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त किया है। इतना ही नहीं, उनकी यह रेटिंग उन्हें दुनिया की शीर्ष 100 महिला शतरंज खिलाड़ियों में लगभग 72वें स्थान पर भी स्थापित करती है।
Huge congratulations to Bodhana Sivanandan on becoming England’s top female chess player at just 11 years old.
— Rishi Sunak (@RishiSunak) April 2, 2026
We once played each other in the Downing Street garden. Let’s just say her success has not come as a shock! pic.twitter.com/KZ2EcXysyO
बोधना की यात्रा कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान शुरू हुई, जब उन्होंने पहली बार घर पर शतरंज की बिसात के सामने बैठकर खेलना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से चार बार की ब्रिटिश महिला चैंपियन लैन याओ को पीछे छोड़ते हुए इंग्लैंड की शीर्ष महिला खिलाड़ी बनने का इतिहास रचा। इसके साथ ही उन्होंने महिला अंतर्राष्ट्रीय मास्टर का खिताब भी प्राप्त किया और प्रतिष्ठित खिलाड़ियों, जिनमें पूर्व विश्व चैंपियन मारीया मुज़िचुक शामिल हैं, के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत दर्ज की।
विशेषज्ञों का कहना है कि बोधना का यह सफर असाधारण है क्योंकि उन्होंने इतनी कम उम्र में वह स्तर हासिल कर लिया, जो सामान्यतः खिलाड़ियों द्वारा जीवन के बाद के चरणों में प्राप्त किया जाता है। उनकी कहानी न केवल शतरंज जगत में बल्कि वैश्विक स्तर पर विविध पृष्ठभूमियों से आने वाले प्रतिभाशाली युवाओं की क्षमता को उजागर करती है। रिषि सुनेक सहित कई सार्वजनिक हस्तियों द्वारा प्रशंसा पाकर बोधना ने अपनी सफलता को और भी प्रेरणादायक बना दिया है। बोधना शिवानंदन की यह उपलब्धि न केवल इंग्लैंड में बल्कि अंतरराष्ट्रीय शतरंज मंच पर भी भारतीय मूल के खिलाड़ियों की पहचान को मजबूती प्रदान करती है और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गई है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
