बांग्लादेश में मंडराता कट्टरपंथ का साया; सुरक्षा तंत्र की के बीच आतंकी हमलों का हाई अलर्ट
पुलिस मुख्यालय ने प्रतिबंधित चरमपंथी संगठनों की सक्रियता और जेलों से कैदियों के फरार होने के बाद संसद भवन और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा कड़ी करने के निर्देश दिए हैं।

ढाका में सुरक्षा व्यवस्था संभालते सुरक्षा बल
Bangladesh terror high alert : बांग्लादेश के भविष्य पर एक बार फिर अनिश्चितता और भय के काले बादल गहराने लगे हैं। कभी विकास की राह पर तेजी से दौड़ता यह राष्ट्र आज उस चौराहे पर खड़ा है, जहाँ चरमपंथ और उग्रवाद की गूँज प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा रही है। हालिया खुफिया रिपोर्टों और सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट्स ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। यह संकट केवल सुरक्षा व्यवस्था की चूक नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक शून्यता का परिणाम नजर आ रहा है जो सत्ता परिवर्तन के हिंसक दौर के बाद पैदा हुई है।
स्थानीय समाचार पत्र 'ढाका ट्रिब्यून' के संपादकीय और पुलिस मुख्यालय की चेतावनियों ने स्पष्ट किया है कि संसद भवन, महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठान, धार्मिक स्थल और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्र आतंकवादियों के निशाने पर हैं। इस भयावह आशंका की पुष्टि तब हुई जब एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान हुए खुलासों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि पकड़े गए उग्रवादी ने सेना से बर्खास्त किए गए दो उच्चाधिकारियों के साथ सीधे संपर्क होने का दावा किया है। यह सांठगांठ इस ओर इशारा करती है कि उग्रवाद की जड़ें अब व्यवस्था के भीतर तक अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही हैं।
विगत वर्ष जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन और तत्कालीन शेख हसीना सरकार के नाटकीय पतन के बाद से ही बांग्लादेश एक अजीबोगरीब अस्थिरता से जूझ रहा है। सत्ता के केंद्र में आए इस बदलाव ने सुरक्षा ढांचे को बुरी तरह झकझोर दिया है। उस अराजकता के दौर में न केवल बड़े पैमाने पर हिंसा और लूटपाट हुई, बल्कि देश की जेलों से सुरक्षा घेरा तोड़कर कैदियों के फरार होने की घटनाओं ने कोढ़ में खाज का काम किया। आंकड़ों के मुताबिक, उस दौरान लगभग 70 से अधिक खूंखार कट्टरपंथी कैदी जेलों से भागने में सफल रहे, जो अब देश के किसी गुप्त कोने में बैठकर विनाशकारी साजिशें रच रहे हैं।
विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्टों में रेखांकित किया गया है कि इस कार्यकाल के दौरान कई अपराधियों और उग्रवादी विचारधारा से जुड़े व्यक्तियों को आश्चर्यजनक रूप से जमानत मिल गई। इनमें सबसे चौंकाने वाला नाम अंसारुल्लाह बांग्ला टीम के प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी का है, जो 2013 में ब्लॉगर राजीब हैदर की नृशंस हत्या का मुख्य आरोपी था। रहमानी की रिहाई ने उन कट्टरपंथी तत्वों को मनोवैज्ञानिक ऑक्सीजन दी है जो लंबे समय से हाशिए पर थे। इसी का नतीजा है कि 2009 से प्रतिबंधित संगठन 'हिज्ब उत-तहरीर' ने एक बार फिर सड़कों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। राजधानी की सड़कों पर इस्लामिक खिलाफत की मांग और कुछ युवाओं द्वारा लहराए गए आईएसआईएस के झंडे इस बात का प्रमाण हैं कि उग्रवाद की यह आग अब और अधिक भड़क चुकी है।
आज बांग्लादेश एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ उग्रवाद की यह वापसी केवल उसकी आंतरिक समस्या नहीं रह गई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन कट्टरपंथी ताकतों पर नकेल नहीं कसी गई, तो इसका प्रभाव सीमाओं को लांघकर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। गिरती कानून-व्यवस्था और बेलगाम होते उग्रवादी संगठन न केवल बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ढांचे को चुनौती दे रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
