FATF के उपाध्यक्ष बने भारतीय नागरिक विवेक अग्रवाल; असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान को लेकर की बड़ी मांग
भारतीय नागरिक विवेक अग्रवाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का उपाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से नीतिगत मांगें की हैं।

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स में भारतीय नागरिक विवेक अग्रवाल (दाएं) की उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद नई दिल्ली में मीडिया बयान जारी करते एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (बाएं)।
India appointed FATF Vice President Vivek Agrawal : वैश्विक मंच पर टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ जारी अंतरराष्ट्रीय जंग में भारत ने एक ऐसी रणनीतिक और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है, जिसने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के नीतिगत गलियारों में खलबली मचा दी है। वैश्विक वित्तीय सुरक्षा पर नजर रखने वाली सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के उपाध्यक्ष के रूप में भारतीय नागरिक विवेक अग्रवाल को नियुक्त किया गया है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी और अभूतपूर्व सफलताओं में से एक माना जा रहा है। भारत लंबे समय से सीमा पार से होने वाले आतंकवाद के वित्तीय पोषण और अवैध धन शोधन के खिलाफ वैश्विक मंचों पर 'जीरो टॉलरेंस पॉलिसी' यानी शून्य सहिष्णुता की नीति की वकालत करता रहा है। इस ऐतिहासिक नियुक्ति के तुरंत बाद देश की घरेलू राजनीति भी पूरी तरह गर्मा गई है और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक बेहद आक्रामक और सनसनीखेज बयान जारी कर केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी मांग रख दी है।
इस बड़े रणनीतिक घटनाक्रम और राजनीतिक घमासान के मुख्य पहलुओं को रेखांकित करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से इस वैश्विक स्थिति का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया है। ओवैसी ने अपने आधिकारिक बयान में विवेक अग्रवाल की तारीफ करते हुए कहा कि वे एफएटीएफ के वाइस प्रेसिडेंट चुने जाने वाले पहले भारतीय नागरिक हैं, जो पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। इसके साथ ही उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि भारत को अब अपनी इस मजबूत अंतरराष्ट्रीय स्थिति और कूटनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को दोबारा एफएटीएफ की कुख्यात 'ग्रे लिस्ट' में धकेलने के लिए चौतरफा दबाव बनाना चाहिए। ओवैसी के इस तीखे बयान ने साफ कर दिया है कि भारत को मिली यह वैश्विक कुर्सी केवल एक प्रशासनिक पद नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की रीढ़ तोड़ने का एक अचूक हथियार बन सकती है।
इस संवेदनशील सुरक्षा मामले की गहराई में जाते हुए हैदराबाद के सांसद ने अंतरराष्ट्रीय सूचियों की विसंगतियों पर भी कड़ा प्रहार किया। ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान समर्थित और भारत में खूनखराबा मचाने वाले प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) द्वारा जारी की गई प्रतिबंधों की सूची का कोई खास जमीनी फायदा नहीं हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार को विधिक और कूटनीतिक रूप से घेरते हुए मांग की कि टीआरएफ को अब अविलंब संयुक्त राष्ट्र (UN) की वैश्विक आतंकवादी सूची में शामिल कराने के लिए नई दिल्ली को सघन प्रयास करने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा और चौंकाने वाला मुद्दा उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार को पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) को भी आतंकवाद को पनाह देने और उसकी फंडिंग करने के जुर्म में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित संस्थाओं की सूची में शामिल कराने की पुरजोर कोशिश करनी ही चाहिए थी। अपने बयान को और अधिक संवेदनशील बनाते हुए ओवैसी ने देश को नवंबर 2025 में लाल किले पर हुए भीषण सुसाइड ब्लास्ट के जख्मों की याद दिलाई और कहा कि ऐसे घावों का हिसाब चुकता करने का यही सही समय है।
Vivek Agarwal is the first Indian to have been elected Vice President of FATF,what @narendramodi government must do is to bring back Pakistan in Grey List.USA list of TRF is of no real use,UN listing is needed of TRF,Modi government should have & must have tried to list ISI also…— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) June 20, 2026
प्रशासनिक और तकनीकी योग्यता के चश्मे से देखें तो एफएटीएफ के नवनियुक्त उपाध्यक्ष विवेक अग्रवाल का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद शानदार और बेदाग रहा है। इस वैश्विक जिम्मेदारी को संभालने से पहले वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस वित्तीय संस्था में भारतीय प्रतिनिधिमंडल (इंडियन डेलीगेशन) का बेहद कुशलता से नेतृत्व कर चुके हैं। इसके अलावा, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाली देश की सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) के निदेशक के रूप में भी उन्होंने लंबे समय तक अपनी सेवाएं दी हैं, जिसके कारण उन्हें अवैध वित्तीय प्रवाह और टेरर नेटवर्क को ट्रैक करने का सबसे गहरा कूटनीतिक अनुभव हासिल है।
इस पूरे मामले के वित्तीय और अंतरराष्ट्रीय विधिक महत्व को समझना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि जिस 'ग्रे लिस्ट' में पाकिस्तान को वापस भेजने की मांग ओवैसी कर रहे हैं, उसके आर्थिक परिणाम बेहद विनाशकारी होते हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, यदि एफएटीएफ किसी भी देश को उसकी सरजमीं पर पनप रहे टेरर नेटवर्क के कारण 'ग्रे लिस्ट' या 'ब्लैक लिस्ट' में डाल देता है, तो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), वर्ल्ड बैंक (World Bank) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) जैसी दिग्गज वैश्विक वित्तीय संस्थाएं उस देश को दिए जाने वाले विदेशी कर्ज पर न केवल बेहद कड़ी और अपमानजनक शर्तें लगा देती हैं, बल्कि कई मामलों में उनकी वित्तीय जीवन रेखा यानी लोन को पूरी तरह रोक दिया जाता है। अंततः, वैश्विक वित्तीय टास्क फोर्स में भारत की यह धमक और उसके बाद देश के भीतर उठी यह कूटनीतिक मांग यह साफ संकेत देती है कि आने वाले दिनों में भारत आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद आक्रामक अध्याय लिखने जा रहा है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय नियमों के चक्रव्यूह में पाकिस्तान की आर्थिक और सामरिक घेराबंदी पूरी तरह तय मानी जा रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
