ज्यूरिख में उतरा एयरफोर्स वन; क्या ग्रीनलैंड पर लगेगी ट्रंप की मुहर?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावोस WEF सम्मेलन में पहुंचे, जहां ग्रीनलैंड डील और यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी। यूरोपीय नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया और जवाबी टैरिफ की तैयारी से अमेरिका-यूरोप रिश्तों में तनाव गहराता दिख रहा है।

World Economic Forum Davos : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 21 जनवरी 2026 को स्विट्जरलैंड पहुंच गए, जहां वे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेने दावोस आए हैं। हालांकि उनका यह दौरा तय समय से कुछ देरी से पूरा हुआ। उड़ान के दौरान एयर फोर्स वन में तकनीकी समस्या आने के बाद विमान को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा। इसके बाद ट्रंप ने वैकल्पिक विमान एयर फोर्स C-32 से यात्रा की और ज्यूरिख एयरपोर्ट पर उतरे। इस घटनाक्रम के चलते उनका कार्यक्रम करीब दो से तीन घंटे पीछे चला गया।
दावोस पहुंचते ही ट्रंप का एजेंडा वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। जहां एक ओर उन्होंने अमेरिका में बढ़ती जीवन-यापन लागत को प्रमुख मुद्दा बताया है, वहीं ग्रीनलैंड को लेकर उनकी आक्रामक नीति और यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी ने सम्मेलन की दिशा ही बदल दी है।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप का सख्त रुख :
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। उनका कहना है कि सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों और आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अमेरिका को ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहिए। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा, “हमें ग्रीनलैंड चाहिए और इस मुद्दे पर कोई पीछे नहीं हटेगा।”
इस मांग के साथ ही ट्रंप ने डेनमार्क और उसके साथ खड़े सात अन्य नाटो सहयोगी देशों—
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड्स और फिनलैंड—को आर्थिक दबाव की चेतावनी भी दी है।
टैरिफ की धमकी से बढ़ा तनाव :
ट्रंप के अनुसार, यदि ग्रीनलैंड को लेकर समझौता नहीं होता है तो:
- 1 फरवरी 2026 से इन देशों से आयात होने वाले सभी सामानों पर 10% टैरिफ लगाया जाएगा।
- 1 जून 2026 से यह टैरिफ बढ़ाकर 25% तक किया जा सकता है।
- इस ऐलान ने यूरोप की राजनीतिक और कारोबारी दुनिया में चिंता की लहर दौड़ा दी है।
यूरोपीय नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया :
- ट्रंप के बयानों पर यूरोप की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
- यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे गलत करार देते हुए कहा कि यूरोप एकजुट होकर जवाब देगा।
- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के रुख को “दबाव बनाने की राजनीति” बताया और जवाबी कदम उठाने के संकेत दिए।
- डेनमार्क और ग्रीनलैंड प्रशासन ने साफ कर दिया कि ग्रीनलैंड किसी सौदे का हिस्सा नहीं है और अंतिम फैसला वहां के लोगों का होगा।
- नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने कहा कि नाटो की प्राथमिकता यूक्रेन संकट है, न कि ग्रीनलैंड।
- सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय यूनियन अमेरिका के खिलाफ बोइंग विमानों, अमेरिकी व्हिस्की और जींस जैसे उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रही है।
दावोस में ‘पीस ऑफ प्लान’ की भी चर्चा :
ग्रीनलैंड और टैरिफ विवाद के बीच ट्रंप दावोस के साइडलाइन में अपने नए ‘बोर्ड ऑफ पीस प्लान’ को भी आगे बढ़ा रहे हैं। यह प्रस्तावित समूह इजरायल-हमास संघर्ष की निगरानी और गाजा के पुनर्निर्माण में भूमिका निभाने के लिए बनाया गया है।
हालांकि, यूरोपीय देशों ने अभी तक इस पहल पर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में इसे भविष्य में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को सीमित करने की दिशा में कदम बताया गया, लेकिन ट्रंप ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र को जारी रहना चाहिए।
वैश्विक राजनीति के लिए अहम मोड़ :
दावोस सम्मेलन में ट्रंप की मौजूदगी इस बार केवल आर्थिक बहस तक सीमित नहीं रही। ग्रीनलैंड, टैरिफ और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े उनके बयान आने वाले महीनों में अमेरिका-यूरोप संबंधों की दिशा तय कर सकते हैं। दावोस में उठी यह बहस अब साफ संकेत दे रही है कि दुनिया एक नए कूटनीतिक और आर्थिक टकराव के दौर में प्रवेश कर रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
