AI Mining Robots: एडिलेड यूनिवर्सिटी ने बनाई बिना कंट्रोल सेंटर वाली रोबोटिक आर्मी
ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने चींटियों और मधुमक्खियों के तालमेल से प्रेरित होकर ऐसी तकनीक विकसित की है जो गहरी खदानों में खुद माइनिंग कर सकती है।

ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किए गए 'Zumo 2040' जैसे उन्नत ऑटोनॉमस रोबोट्स के झुंड (स्वार्म सिस्टम) को प्रयोगशाला में बनाए गए कृत्रिम खनन माहौल के तहत विभिन्न चरणों में सफलतापूर्वक टेस्ट किया गया।
AI Mining Technology : विज्ञान और तकनीक की दुनिया में अक्सर ऐसी खोजें होती हैं जो इंसान की सोच को ही बदल कर रख देती हैं। कुछ ऐसा ही बड़ा धमाका इस बार वैज्ञानिकों ने किया है, जिसने पूरी दुनिया के खनन उद्योग (Mining Industry) में हड़कंप मचा दिया है। फिल्मों में आपने अक्सर रोबोट्स की सेना को एक साथ मिलकर काम करते या तबाही मचाते देखा होगा, ठीक वैसा ही नजारा अब असल जिंदगी में जमीन के सैकड़ों फीट नीचे अंधेरी खदानों में देखने को मिलने वाला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस आधुनिक दौर में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी 'रोबोटिक आर्मी' तैयार कर ली है, जो बिना किसी इंसानी मदद या कंट्रोल सेंटर के खुद ब खुद माइनिंग का पूरा काम संभाल सकती है। इस अभूतपूर्व तकनीक ने भविष्य में खनन के तरीकों को पूरी तरह से बदलने का इशारा कर दिया है।
दरअसल, मौजूदा समय में माइनिंग का काम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा जोखिम भरा, पेचीदा और खर्चीला होता जा रहा है। दुनिया भर में खदानें लगातार गहरी और खतरनाक होती जा रही हैं, जहां इंसानों को भेजना सीधे तौर पर उनकी जान को जोखिम में डालना है। इसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित एडिलेड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक क्रांतिकारी रास्ता खोज निकाला है। वैज्ञानिकों की इस बेहद खास रिसर्च को प्रतिष्ठित 'नेचुरल साइंसेज' (Natural Sciences) जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जिसने वैज्ञानिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
इस तकनीक की सबसे दिलचस्प और हैरान कर देने वाली बात यह है कि वैज्ञानिकों ने इसे बनाने की प्रेरणा किसी मशीन से नहीं, बल्कि प्रकृति के सबसे छोटे जीवों यानी चींटियों और मधुमक्खियों से ली है। जिस तरह चींटियां और मधुमक्खियां बिना किसी बाहरी गाइडेंस या बिना किसी कमांडर के, आपस में तालमेल बिठाकर भोजन की तलाश करती हैं और भारी से भारी काम को अंजाम देती हैं, ठीक उसी तरह अब ये रोबोट्स भी काम करेंगे। वैज्ञानिकों ने छोटे-छोटे रोबोट्स का एक बेहद एडवांस 'स्वार्म सिस्टम' (Swarm System) यानी रोबोट्स का झुंड तैयार किया है, जो सामूहिक बुद्धिमत्ता (Collective Intelligence) के सिद्धांत पर काम करता है।
इस क्रांतिकारी तकनीक की सफलता को परखने के लिए वैज्ञानिकों ने बकायदा प्रयोगशाला में खदान जैसा ही एक हूबहू और बेहद जटिल कृत्रिम माहौल तैयार किया। इसके बाद छोटे आकार के 'Zumo 2040' रोबोट्स को इस अभियान पर उतारा गया और उन पर तीन अलग-अलग रणनीतियों का कड़ा टेस्ट किया गया। इस परीक्षण के दौरान इन छोटे रोबोट्स ने जिस तरह का शानदार प्रदर्शन किया, उसने रिसर्चर्स को भी दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया।
परीक्षण को कुल तीन चरणों में बांटा गया था। पहले चरण के तहत रोबोट्स ने बेहद खामोशी से सिर्फ खनिज को इकट्ठा किया और बिना किसी गड़बड़ी के वापस अपनी जगह पर लौट आए। इसके बाद दूसरे चरण में इन रोबोट्स ने आपस में जिम्मेदारियों का बंटवारा किया, जिसमें से कुछ रोबोट्स का काम सिर्फ नए संसाधनों और खनिजों को खोजना था, तो वहीं दूसरी टुकड़ी उन खोजे गए संसाधनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही थी। सबसे हैरान करने वाला तीसरा और आखिरी चरण रहा, जहां रोबोट्स ने पहले पूरे माइनिंग इलाके का बारीकी से हवाई और जमीनी सर्वे किया, खनिजों वाली जगहों को अपने सिस्टम में याद रखा और फिर सबसे सुरक्षित व आसान रास्तों का चुनाव करके खनिज को तेजी से इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
इस पूरी तकनीक की जो बात वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा रोमांचित कर रही है, वह है इसका पूरी तरह से आत्मनिर्भर होना। इस पूरे रोबोटिक नेटवर्क में वैज्ञानिकों ने कोई भी मुख्य कंट्रोल सेंटर या मास्टर कंप्यूटर सिस्टम नहीं दिया है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि हर एक रोबोट अपने आस-पास की तात्कालिक परिस्थितियों और खतरों को देखकर खुद अपना फैसला लेगा और पलक झपकते ही दूसरे रोबोट्स के साथ तालमेल बिठा लेगा। इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यदि काम के दौरान कोई एक या कुछ रोबोट किसी दुर्घटना का शिकार होकर बंद भी हो जाते हैं, तो भी बाकी की रोबोटिक आर्मी पर इसका रत्ती भर भी असर नहीं पड़ेगा और खदान में माइनिंग का काम बिना रुके लगातार चलता रहेगा। वैज्ञानिकों की यह खोज न सिर्फ इंसानी जानों को बचाने वाली साबित होगी, बल्कि आने वाले समय में माइनिंग इंडस्ट्री की पूरी तस्वीर और तकदीर को बदलकर रख देगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
