ईरान की बर्बादी का नया चैप्टर? यूरोपीय संघ ने कसी नकेल; खामेनेई के करीबी ठिकानों पर गिरी गाज
ईरान पर यूरोपीय संघ का बड़ा एक्शन! IRGC को आतंकी संगठन घोषित करने की तैयारी में 27 देश। काजा कल्लास ने 6373 मौतों का हवाला देते हुए कहा- 'आतंकी जैसा व्यवहार होगा'। फ्रांस के समर्थन के बाद खामेनेई की बढ़ी टेंशन। जानिए कैसे IRGC पर प्रतिबंधों से बदलेगा मिडिल ईस्ट का समीकरण और रूस-ईरान गठजोड़ पर क्या होगा असर।

European Union Iran sanctions 2026 : पश्चिम एशिया में पहले से ही जारी तनाव के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे कठोर कूटनीतिक प्रहार करने का मन बना लिया है। अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के पदचिन्हों पर चलते हुए अब यूरोपीय संघ भी ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य शाखा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को एक 'आतंकवादी संगठन' की श्रेणी में डालने जा रहा है। यह फैसला तेहरान के लिए न केवल आर्थिक रूप से विनाशकारी साबित हो सकता है, बल्कि इसके वैश्विक अलगाव की प्रक्रिया को भी पूर्ण कर सकता है।
"आतंकी की तरह व्यवहार": यूरोपीय संघ का सख्त रुख
यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने गुरुवार को इस कड़े फैसले की घोषणा करते हुए तेहरान को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि IRGC ने घरेलू विरोध प्रदर्शनों के दौरान 6,373 निर्दोष नागरिकों की बेरहमी से हत्या की है। कल्लास ने कड़े शब्दों में कहा, "यदि आप एक आतंकवादी की तरह काम करते हैं, तो आपके साथ आतंकवादी की तरह ही व्यवहार किया जाना चाहिए।"
फ्रांस का हृदय परिवर्तन: कूटनीतिक बाधाएं दूर
इस ऐतिहासिक फैसले की राह में अब तक फ्रांस सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था। पेरिस को डर था कि इस कदम से ईरान में मौजूद उसके नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और कूटनीतिक बातचीत के दरवाजे बंद हो जाएंगे। हालांकि, अब फ्रांस ने अपना रुख बदल लिया है।
- असहनीय दमन: फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने स्पष्ट किया कि ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हुआ दमन अब बर्दाश्त से बाहर है और इन अपराधों के लिए कोई माफी नहीं हो सकती।
- सदस्य देशों की एकजुटता: इटली, स्पेन और जर्मनी पहले से ही इसके समर्थन में थे। अब 27 सदस्य देशों की औपचारिक सहमति मिलते ही IRGC को अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट (ISIS) जैसी काली सूची में डाल दिया जाएगा।
IRGC: ईरान की सत्ता का आधार स्तंभ :
ईरान के लिए IRGC केवल एक सेना नहीं है, बल्कि यह देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति का नियंत्रण केंद्र है।
- स्थापना: 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद आयतुल्लाह खुमैनी ने इसकी स्थापना नियमित सेना से अलग इस्लामिक व्यवस्था की रक्षा के लिए की थी।
- शक्ति: यह सीधे सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) को रिपोर्ट करती है और ईरान के सामरिक उद्योगों पर इसका एकाधिकार है।
प्रतिबंधों का प्रहार और परिणाम :
आतंकी सूची में शामिल होने का अर्थ है कि IRGC के सदस्यों पर पूरे यूरोप में यात्रा प्रतिबंध लग जाएंगे और यूरोपीय संघ के अधिकार क्षेत्र में आने वाली उनकी सभी संपत्तियां (Assets) फ्रीज कर दी जाएंगी। रूस के साथ बढ़ती सैन्य नजदीकी और यूक्रेन युद्ध में ड्रोन की आपूर्ति ने ईरान के खिलाफ इस यूरोपीय गुस्से को और हवा दी है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
