होर्मुज की घेराबंदी तोड़ने को 35 देश एक साथ; भारत को भी बुलावा
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच होर्मुज संकट पर 35 देशों की बैठक में शामिल होगा भारत। 8 भारतीयों की मौत और 1 करोड़ की सुरक्षा पर MEA की बड़ी रिपोर्ट। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

Strait of Hormuz closure global energy crisis
Strait of Hormuz closure global energy crisis : पश्चिम एशिया की सुलगती आग ने अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के विनाशकारी हमलों के बाद उपजे तनाव ने दुनिया की सबसे संवेदनशील 'नब्ज' यानी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है। इस रणनीतिक जलमार्ग के ठप होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति पर अस्तित्व का संकट मंडराने लगा है। इस वैश्विक गतिरोध को तोड़ने और ऊर्जा के प्रवाह को बहाल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महामंथन शुरू हो गया है, जिसमें ब्रिटेन ने भारत को एक निर्णायक भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि होर्मुज संकट के समाधान के लिए आयोजित की जा रही 35 देशों की बहुपक्षीय वार्ता में शामिल होने के लिए भारत को ब्रिटेन की ओर से औपचारिक निमंत्रण प्राप्त हुआ है। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री वर्चुअल माध्यम से इस उच्च स्तरीय बैठक में शिरकत कर रहे हैं। इस पहल का एकमात्र और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य उस जलमार्ग को फिर से खोलना है, जो वैश्विक तेल ट्रांजिट की लाइफलाइन माना जाता है। भारत का इस बैठक में शामिल होना न केवल उसकी बढ़ती वैश्विक साख को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि ऊर्जा सुरक्षा के मामले में भारत एक अनिवार्य पक्षकार है।
इस युद्ध और तनाव के बीच विदेशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा एक ज्वलंत प्रश्न बनी हुई है। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भारतीयों की स्थिति पर सवाल पूछे गए, तो विदेश मंत्रालय ने एक विस्तृत और संवेदनशील तस्वीर पेश की। प्रवक्ता ने बताया कि संकट के इस दौर में करीब एक करोड़ भारतीय इन क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं। यद्यपि भारतीय दूतावास लगातार उनके संपर्क में हैं और अधिकांश नागरिक सुरक्षित स्थानों पर हैं, लेकिन युद्ध की विभीषिका ने अपनी छाप छोड़ी है। बेहद दुखद जानकारी साझा करते हुए मंत्रालय ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में अब तक आठ भारतीयों की जान जा चुकी है, जबकि एक नागरिक अभी भी लापता है। सरकार लापता व्यक्ति की तलाश और शेष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास कर रही है।
आर्थिक और रणनीतिक पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्रालय ने उन अफवाहों पर भी विराम लगा दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों पर विशेष शुल्क लगाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ इस प्रकार के किसी भी शुल्क को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है और समुद्री व्यापार को सुचारू बनाने के प्रयास जारी हैं। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक युद्ध की आहट है। भारत का इस बहुपक्षीय मंच पर हस्तक्षेप यह तय करेगा कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और वैश्विक शांति की दिशा क्या होगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
