सीएसएमटी में आयोजित हेरिटेज वॉक और प्रदर्शनी के माध्यम से रेलवे की ऐतिहासिक वास्तुकला और 138 साल पुराने गौरवशाली सफर को प्रदर्शित किया गया।

मध्य रेलवे ने विश्व धरोहर दिवस-2026 के अवसर पर अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और वास्तुशिल्प वैभव का भव्य उत्सव मनाया। इस कार्यक्रम का आयोजन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और भारतीय रेलवे के गौरव, छत्रपती शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) में किया गया, जो पिछले 138 वर्षों से अपनी भव्यता के साथ अडिग खड़ा है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (ICOMOS) द्वारा शुरू किए गए इस दिवस का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। ICOMOS के प्रस्ताव के अनुसार, वर्ष 2026 की थीम “संघर्ष और आपदाओं के संदर्भ में अस्तित्वगत विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया” निर्धारित की गई है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर मध्य रेलवे के अतिरिक्त महाप्रबंधक श्री प्रतीक गोस्वामी ने प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंता श्री सुबोध कुमार सागर और मुख्यालय एवं मुंबई मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ‘हेरिटेज वॉक’ का नेतृत्व किया। इस पदयात्रा के माध्यम से सीएसएमटी की बेजोड़ स्थापत्य कला और भारतीय रेलवे के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित किया गया। इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के नागरिकों, नागरिक सुरक्षा बल के सदस्यों, स्काउट्स एंड गाइड्स और भारी संख्या में रेलवे कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक अपनी भागीदारी दर्ज की।

हेरिटेज वॉक का औपचारिक शुभारंभ मुंबई सीएसएमटी के प्लेटफॉर्म नंबर 14 और 15 के मध्य स्थित हेरिटेज सहयोगी में प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ हुआ। इस प्रदर्शनी में सीएसएमटी की वास्तुकला की बारीकियों को दर्शाने वाले डिस्प्ले बोर्ड, रेलवे स्टेशनों, पुलों और नेरल-माथेरान रेलवे पर आधारित लघु फिल्में, साथ ही पुराने इंजनों व डिब्बों की प्रतिकृतियां प्रदर्शित की गई थीं। हेरिटेज गैलरी की दीवारों को महाराष्ट्र की ऐतिहासिक इमारतों, रेलवे और पर्यटन स्थलों के मनमोहक चित्रों से सजाया गया था। इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रेलवे के कबाड़ और अनुपयोगी सामग्री से निर्मित महात्मा गांधी की प्रतिमा रही। इस दौरान अधिकारियों और आगंतुकों ने हेरिटेज संग्रहालय और प्रतिष्ठित ‘स्टार चैंबर’ का भी भ्रमण किया।

समारोह के दौरान अतिरिक्त महाप्रबंधक ने उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को रेलवे की विरासत, ऐतिहासिक स्टेशनों और इंजनों के संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने सभी से विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संवर्धन की भावना को आत्मसात करने का आह्वान किया। उत्सव की पूर्व संध्या पर सीएसएमटी की ऐतिहासिक इमारत को विशेष विद्युत रोशनी से जगमगाया गया, जिसने इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा दिए।

मध्य रेलवे की विरासत पर दृष्टि डालें तो ब्रिटिश इंजीनियर फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस द्वारा डिजाइन किया गया सीएसएमटी भवन इंडो-गॉथिक वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। इसका निर्माण 1878 में शुरू हुआ और 1888 में ₹16,13,863 की लागत से पूर्ण हुआ। यह संरचना विक्टोरियन गॉथिक रिवाइवल शैली को मुगल और पारंपरिक भारतीय तत्वों के साथ जोड़ती है। इसके अतिरिक्त, 16 अप्रैल 1853 को देश की पहली रेल यात्रा का साक्षी रहा भायखला स्टेशन अब 173 वर्ष पुराना हो चुका है, जिसे इसकी मूल गॉथिक शैली में पुनर्जीवित किया गया है। वहीं, 1907 में शुरू हुई 119 साल पुरानी नेरल-माथेरान लाइट रेलवे आज भी अपनी नैरोगेज लाइन के माध्यम से यात्रियों को जंगलों और पहाड़ियों के बीच एक जादुई अनुभव प्रदान कर रही है। मध्य रेलवे के सभी मंडलों और कार्यशालाओं में भी इस अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो आधुनिकीकरण के साथ अपनी विरासत को संजोने की रेलवे की प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।

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