अंग्रेजों ने क्यों चलाई रेल? 'रेल्स थ्रू राज' में पी.के. मिश्रा ने खोले 150 साल पुराने राज!
वरिष्ठ रेलवे अधिकारी पी.के. मिश्रा द्वारा लिखित पुस्तक 'रेल्स थ्रू राज' ईस्ट इंडियन रेलवे के 1841-1861 के इतिहास, औपनिवेशिक भारत पर इसके प्रभाव और श्रमिक संघर्षों को उजागर करती है। प्राथमिक स्रोतों पर आधारित यह पुस्तक भारतीय रेलवे की विरासत, इंजीनियरिंग उपलब्धियों और सामाजिक बदलावों का एक प्रामाणिक दस्तावेज है, जो इतिहास प्रेमियों के लिए अनिवार्य है।

भारतीय रेलवे केवल लोहे और भाप का ढांचा नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक और राजनीतिक विकास की एक जीवित धड़कन है। इसी ऐतिहासिक सत्य को उजागर करती है वरिष्ठ रेलवे अधिकारी और प्रख्यात इतिहासकार पी.के. मिश्रा की नई पुस्तक, “रेल्स थ्रू राज: द ईस्ट इंडियन रेलवे एंड द मेकिंग ऑफ कोलोनियल इंडिया” (Rails through Raj: The East Indian Railway and the Making of Colonial India)। मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली और रेल कोच फैक्ट्री, कपूरथला के महाप्रबंधक पी.के. मिश्रा द्वारा लिखित यह पुस्तक महज एक इतिहास का दस्तावेज नहीं, बल्कि 1841 से 1861 के बीच भारत में हुए उस आमूलचूल परिवर्तन की गाथा है, जिसने एक महाद्वीप को स्टील की पटरियों से बांध दिया था।
प्राथमिक स्रोतों पर आधारित एक प्रमाणिक दस्तावेज यह पुस्तक ब्रिटिश भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने में ईस्ट इंडियन रेलवे (EIR) की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करती है। लेखक ने गहन शोध के बाद आधिकारिक पत्राचार, इंजीनियरिंग रिकॉर्ड, अदालती कार्यवाही और समकालीन समाचार पत्रों जैसे प्राथमिक पुरालेखीय स्रोतों (Primary Archival Sources) का उपयोग कर यह कृति तैयार की है।
पुस्तक में केवल तकनीक और प्रशासन का ही वर्णन नहीं है, बल्कि यह साम्राज्य के मानवीय और सामाजिक मूल्यों को भी सामने लाती है। यह बताती है कि कैसे रेलवे ने पूर्वी भारत में शासन, श्रम, अकाल राहत और जनजीवन को प्रभावित किया। यह इस्पात की पटरियों के माध्यम से विजय, वाणिज्य और परिवर्तन की कहानी है, जो औपनिवेशिक राजनीति से लेकर उन भूले-बिसरे मजदूरों तक की दास्तां सुनाती है जिन्होंने अपने पसीने से इस नेटवर्क को खड़ा किया।
इंजीनियरिंग नेतृत्व और विरासत संरक्षण का अद्भुत संगम पी.के. मिश्रा (IRSME) न केवल भारतीय रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, बल्कि देश के प्रमुख रेलवे इतिहासकारों में गिने जाते हैं। अपने विशिष्ट करियर के दौरान, उन्होंने इंजीनियरिंग नेतृत्व को भारत की रेलवे विरासत के संरक्षण के साथ बखूबी जोड़ा है। उनका मानना है कि रेलवे नेटवर्क राष्ट्र के विकास का एक जीवंत रिकॉर्ड है।
आसनसोल और मालदा डिवीजनों (पूर्वी रेलवे) के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के रूप में, श्री मिश्रा ने 50 से अधिक ऐतिहासिक रेलवे संरचनाओं के जीर्णोद्धार का नेतृत्व किया। इनमें भारत का पहला रेलवे संस्थान 'डूरंड इंस्टीट्यूट', राजमहल स्टेशन और साहिबगंज के रिवरसाइड बंगले शामिल हैं। उनका 'एडेप्टिव रीयूज' (अनुकूली पुन: उपयोग) का मॉडल जीर्ण-शीर्ण औपनिवेशिक इमारतों को स्काउट डेन्स, कम्युनिटी हॉल और रेलवे कार्यालयों जैसे जीवंत सार्वजनिक स्थानों में बदलने में बेहद सफल रहा है।
दक्षिण से उत्तर तक विरासत की रक्षा दक्षिण पश्चिम रेलवे के अतिरिक्त महाप्रबंधक (AGM) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने हुबली में रेलवे संग्रहालय का निर्माण और मैसूरु रेलवे संग्रहालय का नवीनीकरण करवाया। साथ ही, धारवाड़ में कर्नाटक विश्वविद्यालय की 130 साल पुरानी हेरिटेज घड़ी को पुनर्जीवित किया, जो कभी साउदर्न मराठा रेलवे का मुख्यालय हुआ करता था। वर्तमान में, वह रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री में एक 'रेलवे हेरिटेज पार्क' विकसित कर रहे हैं, जो एक कार्यशील उत्पादन इकाई को रेलवे विकास के संग्रहालय में बदलने की एक महत्वाकांक्षी पहल है।
अतीत और भविष्य के बीच एक सेतु "रेल्स थ्रू राज" ईस्ट इंडियन रेलवे के प्रारंभिक वर्षों का अब तक का सबसे व्यापक और प्रामाणिक इतिहास है। पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित निबंधों और अन्य कॉफी टेबल बुक्स के बाद, पी.के. मिश्रा की यह नवीनतम कृति रेलवे इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह पुस्तक पाठकों को उस दौर में ले जाती है जब रेलवे ने भारत के भूगोल और नियति को हमेशा के लिए बदल दिया था। यह केवल ट्रेनों की कहानी नहीं है, बल्कि साम्राज्य, प्रतिरोध और उस 'लौह पथ' की कहानी है जिसने आधुनिक भारत की नींव रखी।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
