मुंबई, 26 मई, 2026:

आगामी मानसून 2026 के रौद्र रूप से निपटने और भारी बारिश के दौरान भी मायानगरी की लाइफलाइन कही जाने वाली उपनगरीय लोकल ट्रेनों के निर्बाध एवं सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम रेलवे ने इस बार एक बेहद व्यापक और अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है। मानसून सीजन के दौरान पटरियों पर पानी भरने और ट्रेनों की रफ्तार थमने की आशंकाओं को पूरी तरह खत्म करने के उद्देश्य से मुंबई उपनगरीय नेटवर्क में मिशन मोड पर युद्घस्तर पर तैयारियां पूरी की गई हैं। इन समग्र और बेहद कड़े उपायों का मुख्य लक्ष्य मूसलाधार बारिश के दौरान पैदा होने वाले व्यवधानों को न्यूनतम स्तर पर लाना और लाखों रेल यात्रियों की सुरक्षा को अचूक बनाना है। उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि पश्चिम रेलवे द्वारा मानसून तैयारी एवं शमन के लिए पूर्व में की गई उत्कृष्ट पहलों के परिणाम स्वरूप ही पिछले लगातार दो वर्षों में मुंबई उपनगरीय क्षेत्र के किसी भी हिस्से में लंबे समय तक जलभराव अथवा बाढ़ जैसी भयावह स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और मानसून के थपेड़ों के बावजूद कोई बड़ी सेवा बाधा सामने नहीं आई।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री विनीत अभिषेक द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति संख्या 2026/05 के माध्यम से इस महाअभियान की जमीनी हकीकत सामने आई है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आगामी मानसून सीजन में बिना किसी रुकावट के लगातार ट्रेन सेवाएं संचालित करने के लिए कई विशिष्ट और बेहद लक्षित कार्यों को अंजाम दिया गया है। इस रणनीतिक कार्ययोजना के तहत पुलियों, नालों तथा जल निकासी मार्गों की सघन सफाई और गाद निकासी की गई है, रेलवे पटरियों के समानांतर जमा मलबा एवं कचरा पूरी तरह हटाया गया है, अत्याधुनिक जल निकासी प्रणालियों का निर्माण किया गया है, अतिरिक्त उच्च क्षमता वाले जल निकासी पंपों की स्थापना की गई है और रेल पटरियों को नुकसान पहुंचाने वाले पेड़ों की छंटाई जैसी प्रमुख गतिविधियां व्यापक स्तर पर संचालित की गई हैं। पश्चिम रेलवे ने मानसून परिचालन को फुलप्रूफ बनाने के लिए एक अत्यंत विस्तृत और त्रिस्तरीय कार्य योजना तैयार की है, जिसमें निवारक उपाय, आकस्मिक आपातकालीन योजना तथा आधुनिक तकनीकी हस्तक्षेपों का सटीक समावेश किया गया है, ताकि अवसंरचना की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

इस महायोजना के तकनीकी और जमीनी आंकड़ों की परतें खोलते हुए श्री विनीत अभिषेक ने बताया कि पश्चिम रेलवे द्वारा कुल 58 पुलियों एवं पुल जलमार्गों की सफाई का कार्य चिन्हित किया गया था, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक कार्य सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसी तरह पटरियों के आसपास के लगभग 60 किलोमीटर लंबे नालों की गाद निकासी और सफाई का काम तीव्र गति से किया जा रहा है, जिसमें से 50 किलोमीटर से अधिक की दूरी का कार्य पूर्णता को प्राप्त हो चुका है। इसके अतिरिक्त, सबसे संवेदनशील माने जाने वाले जलभराव वाले स्थानों पर पानी की सुगम निकासी के लिए विशेष रूप से नए नाले और मैनहोल का जाल बिछाया गया है। बाढ़ नियंत्रण उपायों को और अधिक आक्रामक बनाते हुए उपनगरीय खंड के संवेदनशील इलाकों में कुल 126 उच्च क्षमता वाले जल निकासी पंप तैनात किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक हैं। किसी भी अप्रत्याशित संकट से निपटने के लिए आपातकालीन उपयोग हेतु अतिरिक्त पंप भी विभिन्न रखरखाव डिपो में रणनीतिक रूप से पूरी तरह तैयार रखे गए हैं।

जलस्तर की सटीक और पल-पल की जानकारी जुटाने के लिए वास्तविक समय में निगरानी व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत 40 बाढ़ मापक यंत्र तथा 6 ऑटोमेटेड डिजिटल रेन गेज यानी एआरजी रणनीतिक स्थानों पर लगाए गए हैं, जो वर्षा एवं जलस्तर की अचूक और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करते हैं। इसी कड़ी में उन्नत जलस्तर निगरानी प्रणाली के अंतर्गत संवेदनशील पुलों पर वास्तविक समय की सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए पश्चिम रेलवे ने मुंबई उपनगरीय खंड के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थानों पर स्काडा आधारित जलस्तर निगरानी उपकरण स्थापित किए हैं, जो सतत निगरानी बनाए रखते हुए समय पर चेतावनी जारी करेंगे। पटरियों की सफाई के एक अन्य बड़े अभियान के तहत पिछले मानसून से लेकर अब तक उपनगरीय खंड से भारी मात्रा में मलबा, कचरा और खोदी गई मिट्टी को हटाने के लिए विशेष मलबा ट्रेनों के लगभग 480 फेरे संचालित किए जा चुके हैं। यह पूरा कार्य मलबा विशेष वैगनों, जेसीबी, पोकलेन मशीनों तथा बड़ी संख्या में श्रमिकों की सहायता से किया जा रहा है ताकि भारी वर्षा के पानी की सुचारू निकासी में कोई बाधा न आए।

पश्चिम रेलवे ने इस बार आधुनिक तकनीक का अभूतपूर्व उपयोग किया है, जिसके तहत पुलियों एवं नालों की सफाई के बारीक सर्वेक्षण और उसकी कड़ी निगरानी के लिए उन्नत ड्रोन तथा पानी में तैरने वाले फ्लोटर कैमरा ड्रोन हवा और पानी में उतारे गए हैं। चिन्हित अत्यंत संकरे और गहरे स्थानों पर गहन सफाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष सक्शन एवं डी-स्लजिंग मशीनों का भी सहारा लिया जा रहा है। वर्षा जल की निकासी क्षमता को कई गुना बढ़ाने के लिए 1200 मिलीमीटर एवं 1800 मिलीमीटर व्यास की विशाल पाइपों द्वारा माइक्रो-टनलिंग के जटिल कार्यों को अंजाम दिया गया है, जिसके फलस्वरूप चर्चगेट से विरार खंड के बीच माइक्रो-टनल पाइप ओपनिंग्स की कुल संख्या अब बढ़कर 19 हो गई है, जिससे जल निकासी क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज हुई है। ट्रैक संरक्षा एवं संवेदनशील स्थान प्रबंधन के अंतर्गत बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां रेलवे ट्रैक की ऊंचाई बढ़ाने और अतिरिक्त ड्रेनेज जैसी स्थान-विशिष्ट सुधारात्मक प्रणालियां विकसित की गई हैं।

मानसून के दौरान चलने वाली तेज हवाओं और भारी बारिश में पेड़ों के गिरने से ट्रैक बाधित न हो, इसके लिए पटरियों के समीप स्थित खतरनाक पेड़ों की छंटाई और उन्हें हटाने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। इस पूरी तैयारी को प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता करने के लिए पश्चिम रेलवे ने बृहन्मुंबई नगर निगम, मीरा भायंदर नगर निगम तथा वसई विरार शहर नगर निगम के साथ मिलकर संयुक्त रूप से प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक निरीक्षण किया है। इस दौरान पवई झील, विहार झील, तुलसी झील एवं पेल्हार बांध पर स्थित सुरक्षा संरचनाओं, गाइड बंड्स और ओवरफ्लो चैनलों का भी संयुक्त रूप से बारीकी से निरीक्षण किया गया, जिन्हें पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है। आपात स्थितियों के लिए पेट्रोलिंग चार्ट जारी कर संवेदनशील स्थानों पर मानसून पेट्रोलिंग कर्मचारियों, पुल रक्षकों एवं चौकीदारों की भारी तैनाती की गई है, साथ ही विरार खदान में बोल्डर, खदान की धूल और अन्य आवश्यक आपातकालीन सामग्रियों सहित पर्याप्त मात्रा में मानसून रिजर्व सामग्री का बड़ा भंडारण सुरक्षित कर लिया गया है।

पश्चिम रेलवे ने विशेष रूप से माटुंगा रोड एवं वसई रोड जैसे पूर्व में अत्यधिक संवेदनशील रहे जलभराव वाले हॉटस्पॉट पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया है। इन स्थानों पर जल निकासी और ट्रैक स्तर से जुड़ी पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान करने के लिए रेलवे ट्रैक की ऊंचाई बढ़ाने, अतिरिक्त जल निकासी मार्ग बनाने तथा बेहद उच्च क्षमता वाले पंपों की स्थापना करने जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं। पश्चिम रेलवे द्वारा उठाए गए ये अत्यधिक सक्रिय, योजनाबद्ध और आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा उपाय न केवल आगामी मानसून के दौरान यात्रियों की अटूट सुरक्षा और परिचालन की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करते हैं, बल्कि विषम परिस्थितियों में भी मुंबई की धड़कन को बिना रुके चालू रखने के प्रति भारतीय रेलवे की अडिग और सतत प्रतिबद्धता को पूरी तरह साबित करते हैं।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story