मुंबई, 19 अगस्त 2026। पश्चिम रेलवे के मेडिकल विभाग ने अपने पूरे नेटवर्क में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को सुरक्षित एवं स्वच्छ भोजन तथा गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा और पेयजल गुणवत्ता की व्यापक निगरानी शुरू की है। अप्रैल 2026 से अब तक खाद्य पदार्थों के 999 नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें करीब 98 प्रतिशत नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए हैं।

पश्चिम रेलवे की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSA) और गुणवत्ता नियंत्रण (QC) कार्यक्रमों के तहत अप्रैल 2026 से खाद्य नमूनों की जांच, परीक्षण और निरीक्षण किए जा रहे हैं। FSSA के तहत जांचे गए 357 नमूनों में से 356 नमूने फिट पाए गए, जिससे 99.72 प्रतिशत फिटनेस दर्ज हुई। वहीं, गुणवत्ता नियंत्रण के तहत जांचे गए 642 नमूनों में से 626 नमूने फिट मिले।

राजकोट, भावनगर और जगजीवन राम अस्पताल में FSSA तथा गुणवत्ता नियंत्रण, दोनों तरह की सैंपलिंग में 100 प्रतिशत फिटनेस दर्ज की गई। निगरानी कार्यक्रम के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच की जा रही है। परीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई के लिए आगे की प्रक्रिया की जा रही है।

खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत पश्चिम रेलवे को 64 ‘ईट राइट’ प्रमाणपत्र भी मिले हैं। इनमें 51 ‘ईट राइट’ स्टेशन और 13 ‘ईट राइट’ कैंपस शामिल हैं।

‘ईट राइट’ पहल भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सहयोग से संचालित की जा रही है। इसके तहत खाद्य विक्रेताओं और खाद्य संचालकों को निर्धारित खाद्य सुरक्षा एवं स्वच्छता संबंधी प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए प्रशिक्षण, मूल्यांकन और नियमित निगरानी की जाती है। यह पहल यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच अधिक स्वस्थ और सुरक्षित भोजन विकल्पों को भी बढ़ावा देती है तथा सुरक्षित और यात्री-अनुकूल रेलवे वातावरण तैयार करने में योगदान करती है।

पश्चिम रेलवे पेयजल की गुणवत्ता की भी नियमित निगरानी कर रहा है। इसके तहत बैक्टीरियोलॉजिकल जांच और अवशिष्ट क्लोरीन की निगरानी की जा रही है। अप्रैल 2026 से अब तक 3,879 बैक्टीरियोलॉजिकल नमूनों की जांच की गई, जिसमें 99.87 प्रतिशत की कुल फिटनेस दर्ज हुई। इसके अलावा पश्चिम रेलवे में 33,104 अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण किए गए हैं।

जगजीवन राम अस्पताल, वडोदरा, रतलाम, राजकोट, भावनगर और दाहोद में बैक्टीरियोलॉजिकल जांच में 100 प्रतिशत फिटनेस दर्ज की गई।

पेयजल गुणवत्ता की इस व्यापक निगरानी के तहत मुंबई मंडल के उपनगरीय और गैर-उपनगरीय दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है। मुंबई के उपनगरीय क्षेत्र में 333 बैक्टीरियोलॉजिकल नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 329 नमूने फिट पाए गए। वहीं, मुंबई के गैर-उपनगरीय क्षेत्र में जांचे गए सभी 381 बैक्टीरियोलॉजिकल नमूने फिट पाए गए।

अवशिष्ट क्लोरीन के स्तर की भी व्यापक निगरानी की जा रही है। मुंबई के उपनगरीय क्षेत्रों में 2,193 परीक्षण किए गए, जिनमें से 2,192 संतोषजनक पाए गए। मुंबई के गैर-उपनगरीय क्षेत्रों में किए गए 3,090 परीक्षणों में से 3,039 के परिणाम संतोषजनक रहे।

यह परीक्षण कार्यक्रम रेलवे स्टेशनों, कॉलोनियों और अन्य रेलवे प्रतिष्ठानों में नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। इसमें विशेष रूप से पेयजल प्वाइंट और वाटर कूलर पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य पेयजल को सुरक्षित बनाए रखना तथा उचित क्लोरीनेशन और स्वच्छ परिस्थितियों को सुनिश्चित करना है।

पश्चिम रेलवे संबंधित विभागों के समन्वय से पानी के भंडारण टैंकों, पाइपलाइनों, वाटर कूलरों और पानी वितरण केंद्रों की साफ-सफाई एवं रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

नियमित सैंपलिंग, परीक्षण, निरीक्षण और निगरानी के माध्यम से पश्चिम रेलवे खाद्य सुरक्षा और पेयजल गुणवत्ता पर लगातार नजर बनाए हुए है। यह व्यापक निगरानी कार्यक्रम यात्रियों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, खाद्य स्वच्छता और पूरे पश्चिम रेलवे नेटवर्क में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

Pratahkal Newsroom

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