पर्यावरण संरक्षण और नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पश्चिम रेलवे के मुंबई सेंट्रल मंडल ने अपनी हरित ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मंडल ने 2,607 किलोवाट पीक (kWp) की अतिरिक्त रूफटॉप सौर क्षमता स्थापित की है, जिससे इसकी कुल स्थापित सौर क्षमता बढ़कर 8,532 किलोवाट पीक हो गई है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री विनीत अभिषेक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह संपूर्ण सौर नेटवर्क सालाना 1 करोड़ यूनिट से अधिक हरित बिजली उत्पन्न करेगा, जिससे रेलवे को प्रति वर्ष 13.4 करोड़ रुपये की बचत होगी।

इस सौर विस्तार को परिचालन दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से उपनगरीय और गैर-उपनगरीय दोनों क्षेत्रों में क्रियान्वित किया गया है। उपनगरीय क्षेत्र के अंतर्गत, मंडल ने 12 प्रमुख स्टेशनों के प्लेटफॉर्म शेड और रेलवे भवनों पर रूफटॉप सौर पैनल लगाकर 1,608 किलोवाट पीक क्षमता जोड़ी है। इनमें वसई रोड (375 किलोवाट पीक), विरार (175 किलोवाट पीक), दादर (153 किलोवाट पीक), बोरीवली (151 किलोवाट पीक) और मीरा रोड (125 किलोवाट पीक) के अलावा महालक्ष्मी, माटुंगा रोड, गोरेगांव और कांदिवली में 100-100 किलोवाट पीक के प्लांट शामिल हैं। इन परियोजनाओं से प्रति वर्ष 21 लाख यूनिट से अधिक हरित बिजली पैदा होगी, जिससे सालाना लगभग 2.5 करोड़ रुपये की बचत होगी।

गैर-उपनगरीय क्षेत्र में भी 12 प्रमुख स्थानों पर लगभग 1000 किलोवाट पीक सौर क्षमता स्थापित की गई है। इसमें वलसाड लोको शेड कार्यालय में 320.46 किलोवाट पीक के पैनल, वलसाड स्कूल, मल्टी-डिसिप्लिनरी डिवीजनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और वलसाड कैरिज एंड वैगन शेड शामिल हैं। इसके साथ ही वापी, नंदुरबार, नवसारी के प्लेटफॉर्म शेड और चलथान, गंगाधरा, अतुल, उधवाडा व भीलाड़ के स्टेशन भवनों पर भी सोलर पैनल लगाए गए हैं। इनसे सालाना 13.13 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होगा, जिससे 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की बचत सुनिश्चित होगी।

पश्चिम रेलवे अपनी इस प्रतिबद्धता को निरंतर मजबूत कर रहा है। आगामी 2-3 वर्षों में मुंबई सेंट्रल मंडल में 2.13 मेगावाट पीक की और अतिरिक्त सौर क्षमता स्थापित करने का रोडमैप तैयार किया गया है। इस प्रस्तावित विस्तार से सालाना 28 लाख किलोवाट-घंटे (KWh) अतिरिक्त हरित बिजली का उत्पादन होगा, जिससे प्रति वर्ष 3 करोड़ रुपये से अधिक की और बचत होगी। यह पहल न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करेगी, बल्कि ग्रिड बिजली पर निर्भरता को भी सीमित करेगी। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के नेट-जीरो कार्बन मिशन को आगे बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा को रेल अवसंरचना में एकीकृत करने में पश्चिम रेलवे के नेतृत्व को रेखांकित करती है।

Pratahkal Newsroom

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