पश्चिम रेलवे ने 27 अगस्त से 21 अक्टूबर 2026 के बीच पेयजल गुणवत्ता की जांच में 100 प्रतिशत अनुपालन दर्ज किया है। इस अवधि में किए गए सभी 19,018 परीक्षणों के नमूने संतोषजनक पाए गए। पश्चिम रेलवे के चिकित्सा विभाग ने यह जांच यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए संचालित निगरानी कार्यक्रम के तहत की।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री विनीत अभिषेक की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विभिन्न मंडलों और इकाइयों में कुल 19,018 परीक्षण किए गए। इनमें अवशिष्ट क्लोरीन के 16,279 परीक्षण और जीवाणु संबंधी 2,739 परीक्षण शामिल थे। दोनों मानकों पर जांचे गए सभी नमूने संतोषजनक पाए गए।

परीक्षणों की संख्या के मामले में रतलाम मंडल सबसे आगे रहा। यहां अवशिष्ट क्लोरीन के 5,347 और जीवाणु संबंधी 521 परीक्षण किए गए। अहमदाबाद मंडल में अवशिष्ट क्लोरीन के 3,188 तथा जीवाणु संबंधी 512 परीक्षण हुए। वडोदरा मंडल में इन दोनों श्रेणियों के क्रमशः 2,828 और 432 परीक्षण किए गए।

मुंबई सेंट्रल मंडल में अवशिष्ट क्लोरीन के 1,956 और जीवाणु संबंधी 547 परीक्षण किए गए। राजकोट मंडल में 962 अवशिष्ट क्लोरीन तथा 262 जीवाणु संबंधी परीक्षण हुए, जबकि भावनगर मंडल में क्रमशः 1,504 और 398 परीक्षण किए गए।

अन्य इकाइयों में जगजीवनराम रेलवे अस्पताल इकाई ने अवशिष्ट क्लोरीन के 282 और जीवाणु संबंधी 50 परीक्षण किए। दाहोद इकाई में अवशिष्ट क्लोरीन के 212 तथा जीवाणु संबंधी 17 परीक्षण किए गए। पश्चिम रेलवे के सभी छह मंडलों और दोनों इकाइयों में जांच के परिणाम 100 प्रतिशत संतोषजनक रहे।

पेयजल गुणवत्ता जांच में यह उपलब्धि सुनिश्चित करने में चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य निरीक्षकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की भूमिका रही। नियमित रूप से नमूने एकत्र करने, व्यवस्थित तरीके से परीक्षण करने और रेलवे प्रतिष्ठानों में पेयजल की गुणवत्ता की लगातार निगरानी करने के प्रयासों से यह परिणाम हासिल हुआ।

पश्चिम रेलवे ने अपने पूरे नेटवर्क में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के लिए उपलब्ध पेयजल सुविधाओं की निरंतर निगरानी के माध्यम से जनस्वास्थ्य, स्वच्छता और साफ-सफाई के उच्च मानक बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

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