पश्चिम रेलवे ने यात्रियों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान रेलवे स्टेशनों और रेलवे कॉलोनियों में पेयजल गुणवत्ता की निगरानी तेज की। 1 सितंबर 2026 से 20 अक्टूबर 2026 तक किए गए परीक्षणों में अवशिष्ट क्लोरीन की सभी 15,936 जांच और बैक्टीरियोलॉजिकल सुरक्षा से संबंधित सभी 2,674 जांच सफल रहीं। दोनों श्रेणियों में 100 प्रतिशत नमूने निर्धारित परीक्षणों में पास हुए।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री विनीत अभिषेक की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सुरक्षित पेयजल यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली आवश्यक सुविधाओं का अभिन्न हिस्सा है। रेलवे स्टेशनों पर हजारों यात्री, जिनमें बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और प्रतिदिन आवागमन करने वाले यात्री शामिल हैं, अपनी यात्रा के दौरान पेयजल सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं। स्वच्छ और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराना केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। इससे यात्रियों को जलजनित बीमारियों से बचाने और उनकी यात्रा को सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने में मदद मिलती है।

श्री विनीत अभिषेक ने बताया कि 1 सितंबर 2026 से 20 अक्टूबर 2026 तक की जल गुणवत्ता निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम रेलवे के चिकित्सा विभाग ने पूरे रेलवे नेटवर्क में व्यापक स्तर पर पेयजल परीक्षण किए। पानी में कीटाणुशोधन की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए अवशिष्ट क्लोरीन की कुल 15,936 जांच की गईं। इन सभी जांचों में नमूने पास हुए। इसी अवधि में पानी की सूक्ष्मजीव संबंधी सुरक्षा की जांच के लिए 2,674 बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण किए गए और सभी परीक्षण सफल रहे। इस प्रकार दोनों श्रेणियों में 100 प्रतिशत सफलता दर्ज की गई।

अवशिष्ट क्लोरीन परीक्षण और बैक्टीरियोलॉजिकल विश्लेषण पानी में संभावित संदूषण के जोखिम की पहचान करने और कीटाणुशोधन प्रक्रिया की प्रभावशीलता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पश्चिम रेलवे के अनुसार, परीक्षणों में सभी नमूनों का सफल रहना व्यवस्थित नमूना संग्रह, नियमित प्रयोगशाला विश्लेषण, कड़ी निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच सक्रिय समन्वय के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

पश्चिम रेलवे की पेयजल गुणवत्ता निगरानी यात्रियों तक ही सीमित नहीं है। रेलवे कॉलोनियों में रहने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों के स्वास्थ्य एवं कल्याण को भी इसमें शामिल किया गया है। रेलवे का चिकित्सा विभाग आगे भी पेयजल की सख्त निगरानी जारी रखेगा, स्वच्छता एवं साफ-सफाई के उच्च मानकों को बनाए रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएगा, ताकि यात्रियों, रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था कायम रहे।

Next Story