पश्चिम रेलवे 5 नवंबर 2026 को अपना 76वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। इस अवसर पर रेलवे के गौरवशाली इतिहास, विकास यात्रा और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए मुंबई के खार रेलवे स्टेशन के एलिवेटेड डेक पर विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी 5 से 7 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से शाम 19:00 बजे तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री विनीत अभिषेक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पश्चिम रेलवे का वर्तमान स्वरूप 5 नवंबर 1951 को अस्तित्व में आया था। उस समय तत्कालीन बॉम्बे, बड़ौदा एंड सेंट्रल इंडिया रेलवे (BB&CI) का सौराष्ट्र, राजपूताना और जयपुर सहित अन्य राज्य रेलवे के साथ विलय किया गया था। वर्तमान में पश्चिम रेलवे का क्षेत्राधिकार छह मंडलों मुंबई सेंट्रल, वडोदरा, अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर और रतलाम में विस्तारित है।

पश्चिम रेलवे की ऐतिहासिक विकास यात्रा की शुरुआत वर्तमान स्वरूप के गठन से भी पहले हो चुकी थी। बॉम्बे, बड़ौदा एंड सेंट्रल इंडिया रेलवे (BB&CI) की स्थापना वर्ष 1855 में हुई थी। इसकी शुरुआत गुजरात में अंकलेश्वर से उतरान के बीच 29 मील लंबी ब्रॉडगेज रेल लाइन के निर्माण से हुई थी। उस समय सूरत इसका मुख्यालय था। इसके बाद रेल नेटवर्क का विस्तार गुजरात से मुंबई की ओर हुआ और उतरान से ग्रांट रोड तक रेल लाइन को 28 नवंबर 1864 को आधिकारिक रूप से यातायात के लिए खोल दिया गया। यह उपलब्धि वर्तमान पश्चिम रेलवे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।

बीते दशकों में पश्चिम रेलवे ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं और भारतीय रेलवे के अग्रणी नेटवर्क में अपनी पहचान बनाई। उपनगरीय यात्रियों की बढ़ती संख्या और शहर की ओर आवागमन के दबाव को देखते हुए वर्ष 1961 में 9 डिब्बों वाली लोकल ट्रेनें शुरू की गईं। इसके बाद वर्ष 1972 में प्रतिष्ठित मुंबई-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस सेवा की शुरुआत हुई, जिसने पश्चिम रेलवे की उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा।

पश्चिम रेलवे ने समय के साथ उपनगरीय रेल सेवाओं में भी कई ऐतिहासिक पहल कीं। दुनिया की पहली महिला विशेष (लेडीज स्पेशल) उपनगरीय ट्रेन, भारत की पहली 15 डिब्बों वाली उपनगरीय ट्रेन और पहली पूरी तरह वातानुकूलित उपनगरीय ट्रेन शुरू करने का गौरव भी पश्चिम रेलवे को हासिल हुआ। आधुनिक यात्री सुविधाओं के विस्तार के तहत वंदे भारत एक्सप्रेस, अमृत भारत एक्सप्रेस और नमो भारत रैपिड रेल जैसी सेवाएं भी शुरू की गई हैं।

तकनीक के माध्यम से परिचालन को आधुनिक बनाने की दिशा में पश्चिम रेलवे नवाचार, सुरक्षा, डिजिटलीकरण और टिकाऊ कार्यप्रणालियों को प्राथमिकता दे रहा है। यात्रियों की सुविधाओं में सुधार के साथ ट्रेन प्रबंधन प्रणाली, ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन, मोबाइल टिकटिंग और डिजिटल भुगतान जैसी पहलों ने रेल यात्रा को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारत के इतिहास के विभिन्न दौरों के साथ आगे बढ़ते हुए पश्चिम रेलवे ने अपनी कार्यक्षमता और उपलब्धियों को लगातार साबित किया है। वर्ष 1855 में महज 29 मील से शुरू हुआ इसका रेल नेटवर्क आज महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान में 6,000 से अधिक रूट किलोमीटर तक फैल चुका है।

76वें स्थापना दिवस के अवसर पर पश्चिम रेलवे ने अपने वर्तमान और पूर्व अधिकारियों तथा कर्मचारियों के योगदान और समर्पण को स्वीकार करते हुए उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। इन सभी के प्रयासों से पश्चिम रेलवे की ऐतिहासिक विरासत आकार लेती रही है और आधुनिकीकरण तथा प्रगति की यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है।

Pratahkal Bureau

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