जेएनपीटी से डीएफसीसी रूट पर पहली बार चली डबल स्टैक कंटेनर ट्रेन ने माल ढुलाई का नया इतिहास रचा है। 2500 टन से अधिक वजन लेकर दौड़ी इस ट्रेन से देश के लॉजिस्टिक सेक्टर में कौन सी बड़ी क्रांति आने वाली है? जानें इस ऐतिहासिक उपलब्धि की पूरी जानकारी।

भारतीय रेलवे के इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है, जब मुंबई डिवीजन से जेएनपीटी (JNPT) के लिए वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFCC) की कनेक्टिविटी के बाद पहली बार डबल स्टैक कंटेनर ट्रेन को सफलतापूर्वक रवाना किया गया। यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दक्षता का प्रमाण है, बल्कि माल ढुलाई के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात भी है। 20 जून 2026 को जेएनपीटी से लोड की गई 45 बीएलसीएम (BLCM) वैगन वाली इस विशेष मालगाड़ी ने 21 जून को अपना सफर तय किया। इस ट्रेन में 180 टीईयू (TEUs) के साथ कुल 2544.07 टन वजन लदा था, जिसने वेस्टर्न डीएफसीसी मार्ग से होते हुए 232 किलोमीटर की दूरी तय कर मुंबई डिवीजन के संजान गति शक्ति मल्टी-मोडल टर्मिनल तक का सफर पूरा किया।
इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ ही माल ढुलाई की रफ्तार और क्षमता को पंख लग गए हैं। केवल पहली ट्रेन ही नहीं, बल्कि इसी दिन जेएनपीटी से दो और डबल स्टैक कंटेनर रैकों को रवाना किया गया, जिसमें एक गाड़ी दिल्ली डिवीजन के गढ़ी हरसरू (GDGH) के लिए और दूसरी वड़ोदरा डिवीजन के छोटा उदयपुर (CGMV) के लिए प्रस्थान कर गई। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सीधे पोर्ट टर्मिनल से डीएफसीसी के माध्यम से इन ट्रेनों का परिचालन माल ढुलाई की दक्षता को कई गुना बढ़ा देगा। यह पहल न केवल पारगमन समय (ट्रांसिट टाइम) को कम करेगी, बल्कि पोर्ट से माल निकासी की क्षमता को भी सुदृढ़ करेगी। प्रधानमंत्री गति शक्ति और राष्ट्रीय रेल योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, जो सड़क परिवहन पर दबाव को कम करने के साथ-साथ देश की लॉजिस्टिक व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

