विदर्भ क्षेत्र में रेल संपर्क को सुदृढ़ बनाने के लिए रेलवे मंत्रालय अकोला, अमरावती, यवतमाल और वर्धा जिलों में गेज परिवर्तन तथा क्षमता वृद्धि से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इन जिलों से गुजरने वाली विभिन्न मीटर गेज और नैरो गेज रेल लाइनों के गेज परिवर्तन, नई रेल लाइनों तथा सर्वेक्षण संबंधी कार्य अलग-अलग चरणों में हैं। यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

रेल मंत्रालय के अनुसार रतलाम–महू–खंडवा–अकोला 473 किलोमीटर मीटर गेज रेलखंड को गेज परिवर्तन के लिए स्वीकृति दी जा चुकी है। इस परियोजना के तहत रतलाम–पातालपानी 144 किलोमीटर, ओंकारेश्वर रोड–टुकाईथाड़ 132 किलोमीटर तथा अकोला–अकोट 43 किलोमीटर, कुल 319 किलोमीटर खंड पर कार्य पूरा कर कमीशनिंग की जा चुकी है। शेष कार्य के अंतर्गत कुल 320 हेक्टेयर भूमि के मुकाबले 242 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। 41 प्रमुख पुलों, जिनमें एक महत्वपूर्ण पुल भी शामिल है, में से 5 का निर्माण पूरा हो चुका है और शेष पुलों पर कार्य जारी है। अर्थवर्क एवं फॉर्मेशन का कार्य शुरू किया जा चुका है तथा 7 स्टेशनों पर स्टेशन भवनों का निर्माण भी प्रगति पर है।

मूर्तिजापुर–यवतमाल 112 किलोमीटर नैरो गेज रेलखंड का निर्माण वर्ष 1916-17 में हुआ था और इस पर वर्ष 2017 तक रेल संचालन होता रहा। वर्तमान में इस खंड पर ट्रेनों का संचालन नहीं हो रहा है। इसके गेज परिवर्तन के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर लिया गया है।

इसी प्रकार मूर्तिजापुर–अचलपुर 77 किलोमीटर नैरो गेज रेलखंड का निर्माण भी वर्ष 1916-17 में हुआ था और इस पर वर्ष 2019 तक रेल संचालन जारी रहा। वर्तमान में इस खंड पर भी ट्रेन सेवाएं बंद हैं तथा इसके गेज परिवर्तन के लिए डीपीआर तैयार कर लिया गया है।

पुलगांव–आर्वी 35 किलोमीटर नैरो गेज रेलखंड का निर्माण भी वर्ष 1916-17 में हुआ था और इस पर वर्ष 2008 तक रेल संचालन होता रहा। वर्तमान में इस खंड पर भी ट्रेनें नहीं चल रही हैं। इसके गेज परिवर्तन के लिए डीपीआर तैयार करने हेतु फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) को स्वीकृति प्रदान की गई है।

रेल मंत्रालय ने बताया कि मूर्तिजापुर–यवतमाल, मूर्तिजापुर–अचलपुर तथा पुलगांव–आर्वी की तीनों नैरो गेज रेल लाइनें 100 वर्ष से अधिक पुरानी हैं। समय के साथ इनकी परिसंपत्तियां और आधारभूत संरचना काफी जर्जर हो चुकी हैं। अधिक आयु पूरी कर चुके ढांचे के नवीनीकरण की आवश्यकता और सुरक्षा संबंधी कारणों से इन रेलखंडों पर परिचालन बंद किया गया।

मंत्रालय के अनुसार इन तीनों नैरो गेज लाइनों का निर्माण एम/एस सेंट्रल प्रोविंस रेलवे कंपनी लिमिटेड (सीपीआरसीएल) ने किया था। इनका संचालन भारतीय रेलवे (तत्कालीन सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के माध्यम से प्रतिनिधित्व) और सीपीआरसीएल के बीच 27 मार्च 1916 तथा 3 अक्टूबर 1917 को हुए दो समझौतों के तहत किया जाता था।

समझौते की धारा 5 के अनुसार भूमि का स्वामित्व रेलवे के पास है और इसे गेज परिवर्तन के लिए उपयोग करने की योजना है। सीपीआरसीएल द्वारा अत्यधिक जर्जर हो चुके ढांचे के रखरखाव तथा पुनर्वास के लिए आवश्यक धन उपलब्ध नहीं कराने के कारण सेंट्रल रेलवे ने वर्ष 2022 में अनुबंध समाप्त करने को मंजूरी दी थी। सीपीआरसीएल ने इस निर्णय को चुनौती दी है। 28 मार्च 2024 को माननीय उच्च न्यायालय ने एक मध्यस्थ की नियुक्ति की और वर्तमान में मध्यस्थता की कार्यवाही जारी है।

विदर्भ क्षेत्र के अकोला, बुलढाणा, अमरावती, यवतमाल और वर्धा जिलों में रेल संपर्क को और बेहतर बनाने के लिए कई नई परियोजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है। वर्धा–नांदेड़ 284 किलोमीटर नई रेल लाइन परियोजना को ₹5,248 करोड़ की लागत से स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना के तहत वर्धा–देवली–कालंब 38 किलोमीटर रेलखंड चालू किया जा चुका है और शेष हिस्से में कार्य जारी है। कुल 1,974 हेक्टेयर भूमि के मुकाबले 1,338 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। 136 प्रमुख पुलों, जिनमें दो महत्वपूर्ण पुल शामिल हैं, में से 93 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। 50 रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) के लक्ष्य में से 25 पूरे किए जा चुके हैं। मार्च 2026 तक इस परियोजना पर ₹4,802 करोड़ का व्यय किया जा चुका है, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए ₹820 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

भुसावल–वर्धा तीसरी एवं चौथी लाइन 314 किलोमीटर परियोजना को हाल ही में ₹9,197 करोड़ की लागत से स्वीकृति दी गई है। वहीं वर्धा–बल्हारशाह चौथी लाइन 135 किलोमीटर परियोजना को भी हाल ही में ₹2,226 करोड़ की लागत से मंजूरी मिली है।

जालना–खामगांव 162 किलोमीटर नई रेल लाइन परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जा चुका है। रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना को स्वीकृति देने की प्रक्रिया में राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों से परामर्श तथा नीति आयोग, वित्त मंत्रालय सहित आवश्यक अनुमोदन लिए जाते हैं। परियोजनाओं की स्वीकृति एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, इसलिए उनकी समयसीमा विभिन्न संबंधित पक्षों द्वारा किए जाने वाले मूल्यांकन और अनुमोदन पर निर्भर करती है।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story