अमरावती के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली वैदेही खडसे ने पत्रकारिता की राह चुनी। संत गाडगेबाबा विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी मेहनत का पहला फल प्राप्त किया। एक दुर्घटना के बाद अंग्रेजी सीखने के उनके दृढ़ संकल्प ने उन्हें 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में प्रतिनिधि के पद तक पहुँचाया।

महावितरण से मुंबई मेट्रो 3 तक का सफर

आगे चलकर महावितरण में पहली महिला पीआरओ (PRO) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने स्थिरता प्राप्त की। वर्ष 2015 से मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में उप महाव़िध प्रबंधक (जनसंपर्क) के पद पर कार्यरत रहते हुए, वे मेट्रो 3 (एक्वा लाइन) जैसी पूरी तरह से भूमिगत परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 33.5 किमी लंबे और 27 स्टेशनों पर कार्यरत इस प्रोजेक्ट ने मुंबई में ट्रैफिक जाम को कम कर सुरक्षित, तेज और आरामदायक यात्रा का नया अवसर प्रदान किया है।

चुनौतियों पर जीत और कुशल नेतृत्व

"इस प्रोजेक्ट में मिठी नदी के नीचे टनलिंग, संकरी जगहों पर काम, पर्यावरणीय संवेदनशीलता, भूमि अधिग्रहण और सामाजिक जटिलताओं जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अश्विनी भिडे के नेतृत्व में सटीक योजना, रणनीतिक सोच और तकनीक के उच्चतम स्तर के कारण यह संभव हो पाया," वैदेही बताती हैं। इस मेट्रो नेटवर्क की वजह से वाहन यात्रा में 35% किमी की कमी आएगी, जिससे प्रदूषण घटेगा और ट्रैफिक से बड़ी राहत मिलेगी, ऐसा अनुमान है।

सफलता के पीछे सुदृढ़ पारिवारिक आधार

व्यावसायिक जीवन की इस सफलता के साथ ही उनका व्यक्तिगत जीवन भी उतना ही संबल देने वाला है। उनके पति इसी क्षेत्र से संबंधित होने के कारण इन चुनौतियों को समझ सकते हैं और समय-समय पर उनकी मदद करते हैं। उनके सपोर्ट के बिना काम करना असंभव था। "मेरी माँ और सास – ये दोनों प्रेम से साथ रहती हैं। उनके सहयोग की वजह से ही मैं बिना किसी चिंता के अपनी दो बेटियों ज्ञानदा और आयरा के साथ घर और काम के बीच संतुलन साध पाती हूँ," ऐसा वे गर्व से कहती हैं।

Pratahkal Bureau

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