पश्चिम रेलवे ने 34 वर्ष पुरानी रूट रिले इंटरलॉकिंग प्रणाली को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम शुरू किया है।

पश्चिम रेलवे के वडोदरा मंडल ने मंडल रेल प्रबंधक राजू भडके के नेतृत्व में रेल परिचालन के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वडोदरा स्टेशन पर व्यापक सिग्नलिंग अपग्रेडेशन और यार्ड री-मॉडलिंग कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। लगभग 34 वर्ष पुरानी सीमेंस निर्मित रूट रिले इंटरलॉकिंग (RRI) प्रणाली को हटाकर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली स्थापित की गई, जिसका सफल कमीशनिंग 1 जुलाई 2026 को किया गया। यार्ड री-मॉडलिंग और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का यह कार्य वडोदरा स्टेशन की परिचालन क्षमता, संरक्षा, विश्वसनीयता तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना स्वीकृत 70 दिवसीय ट्रैफिक वर्किंग ऑर्डर (TWO) के अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से पूरी की गई। 16 मई से 29 जून 2026 तक 45 दिनों की प्री-ट्रैफिक वर्किंग अवधि में कुल 209 घंटे 55 मिनट के एकीकृत ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक लेकर विभिन्न आधारभूत कार्य पूरे किए गए। इसके बाद 30 जून से 1 जुलाई 2026 तक निर्धारित नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) कार्य केवल 23 घंटे 55 मिनट में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया, जबकि इसके लिए 24 घंटे का समय निर्धारित था। इस दौरान मात्र 5 घंटे 46 मिनट का ट्रैफिक ब्लॉक लेकर 147 ट्रेनों, जिनमें 70 अप और 77 डाउन ट्रेनें शामिल थीं, का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया गया।

यार्ड री-मॉडलिंग के तहत परिचालन में बाधा उत्पन्न करने वाली डबल स्लिप डायमंड क्रॉसिंग को हटाकर यार्ड का ट्रैक विन्यास आधुनिक बनाया गया। डबल स्लिप डायमंड क्रॉसिंग के कारण लागू 10 किलोमीटर प्रति घंटा की स्थायी गति सीमा (Permanent Speed Restriction) समाप्त कर लाइन संख्या 6 और 7 पर अनुमेय गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। इससे यार्ड में ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम, तेज और सुरक्षित होगी। डाउन दिशा से आने वाली ट्रेनों का प्लेटफॉर्म संख्या 6 और 7 पर शीघ्र प्रवेश संभव होगा, जिससे ट्रेन डिटेंशन में कमी आएगी और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। स्टेशन पर नया स्टेशन मास्टर कार्यालय, उपकरण कक्ष और स्टोर भी स्थापित किए गए हैं।

वडोदरा यार्ड में री-मॉडलिंग के दौरान 10 पॉइंट्स एवं क्रॉसिंग (P&C) हटाए गए, 12 स्थानों पर ट्रैक लेआउट में सुधार किया गया तथा 13 नए पॉइंट्स एवं क्रॉसिंग स्थापित किए गए। लगभग 1.5 किलोमीटर नई रेलवे लाइन बिछाकर लाइन संख्या 6 और 7 को डाउन मेन लाइन तथा सी केबिन को अप गुड्स मेन लाइन से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ा गया। इसके अलावा 10 WCMS, 22 टर्नआउट का नवीनीकरण (TTR/TSR), 15 थिक वेब स्विच (TWS) की स्थापना तथा 22 पॉइंट्स एवं क्रॉसिंग और 1.5 किलोमीटर ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग का कार्य भी पूरा किया गया।

सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण के अंतर्गत वर्ष 1992 में स्थापित 228 रूटों वाली RRI प्रणाली को हटाकर 189 रूट और 10 स्लॉट वाली अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) प्रणाली स्थापित की गई। नई प्रणाली में 65 डीसी ट्रैक सर्किटों के स्थान पर 66 ड्यूल MSDAC इकाइयों की स्थापना की गई है, जो कुल 132 ट्रैक सेक्शनों को नियंत्रित करती हैं। दक्षिण दिशा में नया ऑपरेटिंग केबिन (OC) बनाया गया है तथा BRCY के साथ ICC संचार के लिए नया EI रैक स्थापित किया गया है। आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था, उन्नत यार्ड लेआउट और प्रत्यक्ष रेल संपर्क उपलब्ध होने से वडोदरा स्टेशन की परिचालन क्षमता, मार्ग लचीलापन (Route Flexibility), समयपालन और सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भविष्य में बढ़ते रेल यातायात के संचालन के लिए यह परियोजना पश्चिम रेलवे की आधारभूत संरचना को और अधिक मजबूत और सक्षम बनाएगी।

यार्ड री-मॉडलिंग के साथ ओवरहेड विद्युत (OHE) अवसंरचना के आधुनिकीकरण का कार्य भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस दौरान लगभग 70 मीट्रिक टन नए स्टील स्ट्रक्चर निर्मित और स्थापित किए गए, जबकि 15 मीट्रिक टन पुराने स्टील स्ट्रक्चर को सुरक्षित रूप से हटाया गया। परियोजना के अंतर्गत नई लाइन संख्या 6 और 7 की संपूर्ण OHE वायरिंग पूरी की गई। मुख्य लाइन पर लगभग 2,576 मीटर नई कॉन्टैक्ट एवं कैटेनेरी वायर बिछाई गई तथा लगभग 1,200 मीटर पुरानी वायरिंग हटाई गई। इसके साथ ही 8 नए क्रॉसओवर पर कॉन्टैक्ट एवं कैटेनेरी वायरिंग का कार्य भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

पूरे कार्य को निर्धारित समय-सीमा में सुरक्षित और सफलतापूर्वक पूरा कराने के लिए वडोदरा मंडल के विद्युत विभाग ने कार्यस्थल और आवश्यक स्थानों, जिनमें गुमटियां भी शामिल हैं, पर प्राथमिकता के आधार पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की, जिससे कर्मचारियों को रात्रि में कार्य करने में किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई। कार्य अवधि के दौरान परिचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रेन संचालन की सतत निगरानी, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था के तहत सुरक्षा विभाग ने सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की। श्रमिकों और रेलकर्मियों के स्वास्थ्य तथा आपातकालीन सहायता के लिए चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और एम्बुलेंस सहित 24×7 चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। वहीं, संरक्षा विभाग के संरक्षा परामर्शदाताओं ने कार्य की निरंतर निगरानी कर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया। संपूर्ण परियोजना की प्रभावी मॉनिटरिंग और विभिन्न विभागों के बीच त्वरित समन्वय के लिए नवीन इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग भवन में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (Main War Room) स्थापित किया गया, जहां से प्रत्येक चरण की वास्तविक समय में निगरानी और आवश्यक निर्णय लिए गए।

अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली, उन्नत यार्ड लेआउट और आधुनिक ओवरहेड विद्युत अवसंरचना के साथ वडोदरा स्टेशन अब भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सक्षम, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित रेल परिचालन के लिए पूरी तरह तैयार है। यह उपलब्धि भारतीय रेल के आधुनिकीकरण, सुरक्षित रेल संचालन और विश्वस्तरीय रेल अवसंरचना विकसित करने की दिशा में पश्चिम रेलवे का एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau

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