वडोदरा मंडल ने वायर टूटने की विफलता को किया शून्य, स्थापित किया कीर्तिमान
डीआरएम राजू भडके के मार्गदर्शन में 731 किलोमीटर ओएचई वायर बदलकर ट्रेनों की समयपालन में सुधार किया गया।

वडोदरा मंडल के अंतर्गत रेल परिचालन की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए विद्युत विभाग द्वारा किया गया ओएचई वायरों का व्यापक प्रतिस्थापन।
पश्चिम रेलवे के वडोदरा मंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में रेल परिचालन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हुए एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है। मंडल रेल प्रबंधक श्री राजू भडके के कुशल मार्गदर्शन में विद्युत (TRD) विभाग ने अत्यंत जटिल वडोदरा-सूरत खंड सहित पूरे मंडल में ओवरहेड वायर टूटने से होने वाली विफलताओं को शून्य पर लाने में सफलता प्राप्त की है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि का मुख्य आधार कुल 302 ट्रैक किलोमीटर क्षेत्र में जर्जर एवं फेलियर-प्रवण ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) वायरों का व्यापक प्रतिस्थापन रहा है।
वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (TRD) श्री नलिन लोचन गुप्ता के अनुसार, वर्ष 2021 से 2023 के कालखंड में कैटेनरी एवं कॉन्टैक्ट वायर के बार-बार टूटने की घटनाओं ने तकनीकी विफलताओं को जन्म दिया था, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की समयपालन (Punctuality) पर पड़ रहा था। इस गंभीर स्थिति के निवारण हेतु मंडल द्वारा एक विशेष अभियान संचालित किया गया, जिसके अंतर्गत 31 मार्च 2026 तक कुल 731 ट्रैक किलोमीटर (TKM) OHE वायरों को बदला गया। इस कार्य योजना में 363.8 TKM कॉन्टैक्ट वायर और 367.2 TKM कैटेनरी वायर का प्रतिस्थापन सम्मिलित है।
विभागीय आंकड़े इस सुधार की सफलता की पुष्टि करते हैं। मुख्य लाइन पर वायर टूटने के कारण होने वाली TRD विफलताएं, जो वर्ष 2022 में 11 दर्ज की गई थीं, वे 2025 में घटकर शून्य हो गईं। इसी प्रकार, वायर टूटने से मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की समयपालन में होने वाली 223 मिनट की हानि भी वर्ष 2025 में शून्य के स्तर पर आ गई है। आधुनिकीकरण और सुरक्षा के प्रति वडोदरा मंडल की यह प्रतिबद्धता न केवल परिचालन को सुचारु बना रही है, बल्कि भविष्य के लिए उत्कृष्ट रेल सेवाओं का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।

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