वडोदरा मंडल के करचिया यार्ड में हुआ कायाकल्प, बेहतर ट्रैक सुरक्षा और परिचालन से मिलेगी रफ्तार
वडोदरा मंडल के करचिया यार्ड में जलभराव की समस्या का हुआ खात्मा। रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने ट्रैक नवीनीकरण और आधुनिक जल निकासी प्रणाली से परिचालन क्षमता को नई रफ्तार दी है। क्या है इस बड़े बदलाव का असर, जानें पूरी खबर।

पश्चिमी रेलवे के वडोदरा मंडल ने करचिया यार्ड में ट्रैक नवीनीकरण, जल निकासी प्रणाली और सिग्नलिंग सुविधाओं का आधुनिकीकरण कार्य पूरा कर लिया है।
पश्चिम रेलवे के वडोदरा मंडल ने बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए करचिया यार्ड में व्यापक सुधार कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान खोजना और यार्ड की परिचालन दक्षता को नई ऊंचाई देना था। वडोदरा मंडल के जनसंपर्क अधिकारी श्री अनुभव सक्सेना के अनुसार, करचिया यार्ड ट्रेनों की प्राप्ति, प्रेषण, शंटिंग और अनुरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का केंद्र है, जहाँ दक्षिणी भाग में जलभराव के कारण सिग्नल विफलता जैसी तकनीकी चुनौतियां अक्सर बाधा उत्पन्न करती थीं।
इस सुधार कार्यक्रम के तहत इंजीनियरिंग विभाग ने ट्रैक नवीनीकरण, बैलेस्ट पुनर्वास और जल निकासी प्रणालियों को पूरी तरह अपग्रेड किया है। परियोजना के दौरान 837.54 ट्रैक मीटर लंबाई में पुराने ट्रैक को हटाकर नए ट्रैक और बैलेस्ट बिछाए गए, जिसमें लॉन्ग डेड एंड और सिक लाइन जैसी महत्वपूर्ण लोकेशन शामिल हैं। इसके अलावा, 6,586 ट्रैक मीटर साधारण ट्रैक और 28 पॉइंट्स एवं क्रॉसिंग्स की डीप स्क्रीनिंग की गई ताकि ट्रैक की स्थिरता और जल निकासी क्षमता बढ़ सके। साथ ही, लूप और सिक लाइनों पर 6,586 पीएससी स्लीपरों का नवीनीकरण किया गया।
यार्ड की जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 1,129.70 मीटर क्षेत्र में सेस लोअरिंग का कार्य किया गया और 1.5 लाख लीटर क्षमता वाले एक आधुनिक सम्प का निर्माण किया गया। वर्षा जल की निकासी को निर्बाध बनाने के लिए 200 मीटर लंबी आरसीसी नालियां भी तैयार की गई हैं। ट्रैक ज्यामिति में सुधार के लिए 4,355.60 ट्रैक मीटर क्षेत्र में लिफ्टिंग और पैकिंग का कार्य संपन्न हुआ है। इन तकनीकी सुधारों से न केवल मानसून के दौरान यार्ड का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित होगा, बल्कि सिग्नलिंग प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ने से रेलवे की परिचालन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह पहल रेलवे परिसंपत्तियों के प्रदर्शन और उनकी आयु बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों एवं माल ढुलाई सेवाओं के लिए एक सुरक्षित भविष्य का आधार तैयार करती है।

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