केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति और नई रेल लाइनों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। बुधवार को लोकसभा में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नैनीताल के सांसद अजय भट्ट द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में बताया कि क्या सरकार को उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से प्रमुख शहरों और कस्बों को जोड़ने वाली नई रेल लाइनों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

रेल मंत्री ने अपने उत्तर में कहा कि उत्तराखंड में पूर्ण या आंशिक रूप से आने वाली रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं और सुरक्षा कार्यों के लिए बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2009–14 के दौरान औसत वार्षिक आवंटन 187 करोड़ रुपये था, जबकि वर्ष 2026–27 में इसे बढ़ाकर 4,769 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 25 गुना से अधिक की वृद्धि है।

उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार उत्तराखंड में पूर्ण या आंशिक रूप से आने वाली 2 नई रेल लाइन परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इनकी कुल लंबाई 188 किलोमीटर है और इनकी अनुमानित लागत 39,686 करोड़ रुपये है। इनमें से 6 किलोमीटर रेल लाइन चालू की जा चुकी है, जबकि मार्च 2026 तक इन परियोजनाओं पर 22,014 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है।

रेल मंत्री ने हाल ही में पूर्ण हुई कुछ प्रमुख रेलवे परियोजनाओं की भी जानकारी दी। इनमें 28 किलोमीटर लंबी देवबंद–रुड़की नई रेल लाइन, जिसकी लागत 1,289 करोड़ रुपये रही, 27 किलोमीटर लंबी हरिद्वार–लक्सर डबलिंग परियोजना, जिसकी लागत 347 करोड़ रुपये रही, तथा 102 किलोमीटर लंबी बरेली–टनकपुर गेज परिवर्तन परियोजना, जिसकी लागत 313 करोड़ रुपये रही, शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को बेहतर रेल संपर्क उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश–कर्णप्रयाग नई रेल लाइन परियोजना स्वीकृत की गई है। इस परियोजना का मार्ग देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरता है। इसके माध्यम से देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को ऋषिकेश तथा देश की राजधानी नई दिल्ली से रेल संपर्क मिलेगा।

रेल मंत्री के अनुसार परियोजना का अधिकांश हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। इस परियोजना में 104 किलोमीटर लंबाई की 16 मुख्य लाइन सुरंगों तथा लगभग 98 किलोमीटर लंबाई की 12 एस्केप सुरंगों का निर्माण शामिल है। अब तक 101 किलोमीटर लंबाई की मुख्य लाइन सुरंगें तथा 95 किलोमीटर से अधिक लंबाई की एस्केप सुरंगें पूरी की जा चुकी हैं।

उन्होंने बताया कि कार्यों की गति बढ़ाने के लिए विभिन्न सुरंगों में 8 एडिट (Adit) की पहचान की गई थी। इन एडिट के माध्यम से सुरंग निर्माण के अतिरिक्त कार्यस्थल विकसित किए गए, जिससे लंबी सुरंगों की खुदाई में तेजी आई। सभी 8 एडिट, जिनकी कुल लंबाई 5 किलोमीटर है, का कार्य भी पूरा हो चुका है।

परियोजना में 19 महत्वपूर्ण और प्रमुख पुलों का निर्माण भी शामिल है। इनमें से 11 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष पुलों पर कार्य जारी है।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पिछले तीन वर्षों अर्थात 2023-24, 2024-25, 2025-26 तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान उत्तराखंड में पूर्ण या आंशिक रूप से आने वाली कुल 446 किलोमीटर लंबाई की 8 सर्वेक्षण परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें 3 नई रेल लाइन तथा 5 डबलिंग परियोजनाओं के सर्वे शामिल हैं।

इन प्रमुख सर्वेक्षणों में 58 किलोमीटर लंबी धामपुर–काशीपुर नई रेल लाइन, 81 किलोमीटर लंबी देहरादून–सहारनपुर (शाकुंभरी देवी के रास्ते) नई रेल लाइन, 22 किलोमीटर लंबी लालकुआं–काठगोदाम डबलिंग, 66 किलोमीटर लंबी लालकुआं–रामपुर डबलिंग तथा 12 किलोमीटर लंबी हरिद्वार–मोतीचूर–रायवाला डबलिंग परियोजना शामिल हैं।

रेल मंत्री ने यह भी बताया कि देशभर में रेलवे परियोजनाओं और कार्यों से संबंधित प्रस्ताव, अनुरोध, सुझाव और अभ्यावेदन राज्य सरकारों, सांसदों, केंद्र सरकार के मंत्रालयों, जनप्रतिनिधियों, रेलवे की अपनी आवश्यकताओं, विभिन्न संगठनों तथा रेल उपयोगकर्ताओं से रेलवे बोर्ड, जोनल रेलवे और मंडल कार्यालय सहित विभिन्न स्तरों पर लगातार प्राप्त होते रहते हैं। चूंकि ऐसे प्रस्तावों और सुझावों की प्राप्ति एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, इसलिए उनका कोई केंद्रीकृत संकलन नहीं रखा जाता। हालांकि, प्रत्येक प्रस्ताव की व्यवहार्यता और औचित्य के आधार पर समय-समय पर परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी रेलवे परियोजना की स्वीकृति कई मानकों और कारकों पर निर्भर करती है। इनमें प्रस्तावित मार्ग पर संभावित यातायात और उसकी आर्थिक व्यवहार्यता, प्रथम और अंतिम छोर तक संपर्क, छूटे हुए रेल संपर्कों को जोड़ना, अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध कराना, भीड़भाड़ या क्षमता से अधिक उपयोग वाली लाइनों का विस्तार, राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और जनप्रतिनिधियों की मांग, रेलवे की परिचालन आवश्यकताएं, सामाजिक-आर्थिक पहलू तथा उपलब्ध वित्तीय संसाधन शामिल हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे परियोजनाओं का समय पर पूरा होना भी अनेक कारकों पर निर्भर करता है। इनमें राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण, वन स्वीकृति, बाधित उपयोगिताओं का स्थानांतरण, विभिन्न प्राधिकरणों से वैधानिक मंजूरी, क्षेत्र की भौगोलिक और भू-वैज्ञानिक परिस्थितियां, परियोजना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति तथा किसी विशेष परियोजना स्थल पर वर्ष में उपलब्ध कार्य अवधि जैसे कारक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी परिस्थितियां परियोजनाओं की लागत और उनके पूरा होने की समयसीमा को प्रभावित करती हैं।

Pratahkal Newsroom

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