मुंबई से मध्यप्रदेश के पवित्र तीर्थों — उज्जैन, इंदौर, ओंकारेश्वर और महेश्वर — की त्रिदिवसीय आध्यात्मिक यात्रा के लिए 6 से 9 दिसंबर 2025 तक का संपूर्ण कार्यक्रम तय कर लिया गया है। यह यात्रा भक्तिमय वातावरण, सुसंगठित समय-निर्धारण और अनुशासित प्रवास योजना का एक आदर्श उदाहरण है, जिसमें हर क्षण श्रद्धा और व्यवस्था का संतुलन झलकता है।

यात्रा का शुभारंभ 6 दिसंबर को मुंबई के बोरीवली स्टेशन से होगा, जहां से श्रद्धालु MMCT-KIR स्पेशल ट्रेन (09189) द्वारा प्रस्थान करेंगे। लगभग 11 घंटे की यात्रा के बाद रात 10:48 बजे उज्जैन पहुंचकर वे विश्राम करेंगे और उसके बाद सीधे प्रभु महाकालेश्वर की भस्म आरती के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे। यह आरती सुबह 3 बजे आरंभ होती है और इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख श्री महाकालेश्वर मंदिर की सबसे दिव्य परंपरा माना जाता है।

भस्म आरती और दर्शन के बाद यात्रियों को उज्जैन शहर के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का दर्शन कराया जाएगा। इसमें श्रीराम घाट (शिप्रा नदी तट), कालभैरव मंदिर, गौ घाट, भर्तृहरि गुफा, संदीपनी आश्रम, जंतर-मंतर वेधशाला, श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर, भारत माता मंदिर, त्रिवेणी संग्रहालय और चिंतामण गणेश मंदिर शामिल हैं। दिनभर के दर्शन और विश्राम के पश्चात संध्या में भक्त महाकाल कॉरिडॉर की भव्यता का साक्षात्कार करेंगे, जो उज्जैन के धार्मिक वैभव का आधुनिक प्रतीक बन चुका है।

दूसरे दिन, यानी 8 दिसंबर को, श्रद्धालु बस से ओंकारेश्वर के लिए रवाना होंगे। लगभग पांच घंटे की यात्रा के बाद वे नर्मदा नदी तट स्थित श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और ममलेश्वर मंदिर का दर्शन करेंगे। इसके पश्चात नर्मदा तट के सौंदर्य और अहिल्याबाई होलकर की ऐतिहासिक धरोहरों से सजे महेश्वर की ओर प्रस्थान होगा, जहां अहिल्या किला, राजेश्वरी मंदिर और प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों के हँडलूम बाजार का अवलोकन किया जाएगा।

तीसरे दिन यानी 9 दिसंबर को यात्रियों के लिए इंदौर दर्शन का कार्यक्रम निर्धारित है। सुबह महेश्वर से निकलकर वे लालबाग पैलेस, राजवाड़ा पैलेस, बड़ा गणपति मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर और इंदौर संग्रहालय का भ्रमण करेंगे। भोजन एवं विश्राम के बाद शाम को प्रसिद्ध सराफा बाजार का आनंद लिया जाएगा। शाम 6:55 बजे यात्री अवंतिका एक्सप्रेस (12962) से वापसी यात्रा पर मुंबई के लिए प्रस्थान करेंगे, जो 10 दिसंबर की सुबह बोरीवली पहुंचेगी।

यात्रा समिति ने यात्रियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी यात्रियों को समय का पालन अनिवार्य रूप से करना होगा, क्योंकि प्रत्येक स्थल के दर्शन और यात्रा समय को अत्यंत सटीकता से तय किया गया है। ट्रेन टिकट यात्रा आरंभ के समय प्रत्येक यात्री को व्यक्तिगत रूप से सौंपे जाएंगे, जिनकी सुरक्षा और जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।

यह आध्यात्मिक यात्रा न केवल भगवान महाकाल और ओंकारेश्वर के दिव्य दर्शन का अवसर प्रदान करेगी, बल्कि मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को नजदीक से जानने का सुअवसर भी देगी। अनुशासन और समय-पालन से सुसज्जित यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए जीवनभर का अविस्मरणीय अनुभव सिद्ध होगी।

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Pratahkal Bureau

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