कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRCL) ने अपने नेटवर्क में हुए व्यापक और परिवर्तनकारी विकास का विवरण साझा करते हुए यह स्पष्ट किया कि रोहा (महाराष्ट्र) से ठोकुर (कर्नाटक) तक फैला 739 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इंजीनियरिंग कॉरिडोर में से एक है। इस मार्ग पर 91 सुरंगें, 1,891 पुल और पूर्ण विद्युतीकरण की सुविधा इसे तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण बनाते हैं।

यात्री सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कोंकण रेलवे ने 2024–25 में प्रतिदिन औसतन 55 यात्री और 17 मालगाड़ियों का संचालन किया। त्योहारों और मौसमी यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सैकड़ों विशेष ट्रेनों का भी संचालन किया गया। इस दौरान मुंबई–मडगांव और मंगलुरु–मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी नई ट्रेन सेवाएँ यात्रियों के लिए शुरू की गईं, जिससे यात्रा अनुभव और समय की बचत दोनों में सुधार हुआ।

गोवा में थिविम और मडगांव स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एग्जीक्यूटिव लाउंज, रेल आर्केड, फूड कोर्ट और पर्यटन सुविधाओं का उद्घाटन किया गया। महिला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘पिंक बबल’ जैसी पहलें भी शुरू की गई हैं। इसके साथ ही रियल-टाइम एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, डिजी-लॉकर और UPI आधारित टिकटिंग जैसी आधुनिक तकनीकी सुविधाएँ यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी कोंकण रेलवे ने मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग सुविधाओं के माध्यम से माल परिवहन को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाया है। उच्च गुणवत्ता, सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन के लिए ISO प्रमाणनों के साथ कोंकण रेलवे ने राष्ट्रीय स्तर पर रेलवे विकास में एक भरोसेमंद और प्रेरक भागीदार के रूप में अपनी पहचान मजबूत की है।

कोंकण रेलवे का यह परिवर्तनकारी विकास न केवल तकनीकी उत्कृष्टता और सुरक्षित यात्रा का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

Pratahkal Bureau

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