अहमदाबाद में भविष्य की रेल क्रांति की नींव रखते हुए, पश्चिम रेलवे की सर्वे एवं निर्माण संस्था ने आज 28 मई 2026 को सरखेज-धोलेरा नई सेमी हाई-स्पीड रेलवे ब्रॉड गेज डबल लाइन परियोजना के कार्यान्वयन हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कार्यालय स्थित कांफ्रेंस हॉल में आयोजित इस उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता पश्चिम रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) प्रदीप गुप्ता ने की। इस अवसर पर चीफ इंजीनियर कमलेश कुमार, चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर आर.डी. मीना, डिप्टी चीफ सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर (Dy CSTE) रतन बासु सहित निर्माण विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक का विधिवत शुभारंभ करते हुए डिप्टी चीफ इंजीनियर प्रशांत सिंह ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से परियोजना के विस्तृत स्वरूप और रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस प्रोजेक्ट की निर्माण निविदा में गहरी रुचि दिखाते हुए सिविल, इलेक्ट्रिकल और सिग्नल एवं दूरसंचार (S&T) क्षेत्रों की 20 से अधिक अग्रणी फर्मों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भागीदारी की। इसमें लार्सेन एंड टुब्रो, अफ्कोन्स इन्फ्रा, केपीटीएल (KPTL), एचओजी (HOG) प्रोजेक्ट, मिराल इन्फ्रा, खोडल कारपोरेशन, गंगा कंस्ट्रक्शन, नीलकंठ इन्फ्रा और सुभाष इन्फ्रा जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और परियोजना के कार्यान्वयन को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव साझा किए।

बैठक के दौरान परियोजना के कार्यान्वयन, पैकेजिंग और तकनीकी जटिलताओं पर गहन मंथन हुआ। इसमें सिविल कार्यों, ट्रैक बिछाने, ट्रैक्शन, एसएंडटी टेंडर, इंटरफेस कार्यों और डिजाइन डिटेल के कॉन्ट्रैक्ट जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों के सुझावों को रेखांकित करते हुए मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य परियोजना का सफल और प्रभावी धरातल पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी इच्छुक बीडर्स के व्यावहारिक सुझावों पर गंभीरता से विचार करने के उपरांत शीघ्र ही ईपीसी (EPC) टेंडर फ्लोट किया जाएगा।

लगभग 134 किलोमीटर लंबी यह महत्वाकांक्षी दोहरी रेल लाइन अहमदाबाद, धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR), आगामी धोलेरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (National Maritime Heritage Complex) को अत्याधुनिक और निर्बाध रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। 220 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन गति और 200 किलोमीटर प्रति घंटा की परिचालन गति के साथ तैयार होने वाले इस कॉरिडोर में कुल 11 स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इंजीनियरिंग कौशल का प्रदर्शन करते हुए इस परियोजना में 3 मेगा पुल, 74 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट, 39 रोड अंडर ब्रिज और 2 रेल ओवर रेल ब्रिज का निर्माण किया जाएगा, जबकि कुल ट्रैक की लंबाई लगभग 293 किलोमीटर होगी।

लगभग ₹20,667 करोड़ की लागत वाली यह ऐतिहासिक परियोजना भारतीय रेलवे की पहली स्वदेशी तकनीक आधारित सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना होगी, जिस पर भविष्य में नमो भारत ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। अगले चार वर्षों के भीतर इसे पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप विकसित की जा रही यह परियोजना मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को नई मजबूती प्रदान करने के साथ भारत की लॉजिस्टिक दक्षता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगी। यह कॉरिडोर गुजरात को आधुनिक, हरित और उच्च गति परिवहन अवसंरचना के एक नए और गौरवशाली युग में प्रवेश कराने वाली निर्णायक पहल सिद्ध होगा।

Pratahkal Newsroom

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