केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर नई रेल लाइन परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने लिखित जानकारी में बताया कि 189 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को राजस्थान सरकार और रेल मंत्रालय के बीच 50:50 लागत-साझाकरण के आधार पर 2083 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृति दी गई थी।

इस परियोजना के लिए आवश्यक भूमि राजस्थान राज्य सरकार द्वारा अपनी लागत पर उपलब्ध कराई जाएगी। अब तक परियोजना के लिए आवश्यक कुल 1,736 हेक्टेयर भूमि में से 646 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। मार्च 2026 तक इस परियोजना पर 243 करोड़ रुपए का व्यय किया जा चुका है।

बांसवाड़ा क्षेत्र की रेल संपर्कता को और मजबूत करने के उद्देश्य से नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद-अलीराजपुर-नंदुरबार नई रेल लाइन परियोजना के लिए भी सर्वेक्षण और परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की स्वीकृति दी गई है। इस प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई 380 किलोमीटर है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद परियोजना की स्वीकृति के लिए राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों से परामर्श और नीति आयोग, वित्त मंत्रालय जैसे आवश्यक अनुमोदनों का मूल्यांकन किया जाता है। परियोजनाओं की स्वीकृति एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, इसलिए इसकी निश्चित समय-सीमा विभिन्न हितधारकों द्वारा किए जाने वाले मूल्यांकन और अनुमोदन पर निर्भर करती है।

राजस्थान में रेल बजट आवंटन में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राजस्थान राज्य में पूर्णतः या अंशतः पड़ने वाली अवसंरचना परियोजनाओं के लिए वर्ष 2009-14 के दौरान 682 करोड़ रुपए प्रति वर्ष का बजट आवंटन किया गया था, जबकि वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 10,228 करोड़ रुपए हो गया है, जो लगभग 15 गुना वृद्धि है।

राजस्थान में नए रेलपथ निर्माण के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2009-14 के दौरान 798 किलोमीटर नए रेलपथ कमीशन किए गए, जिनकी औसत कमीशनिंग 160 किलोमीटर प्रति वर्ष रही। वहीं वर्ष 2014-26 के दौरान 3,886 किलोमीटर नए रेलपथ कमीशन किए गए, जिसकी औसत कमीशनिंग 324 किलोमीटर प्रति वर्ष रही, जो लगभग दो गुना है।

दिनांक 01.04.2026 की स्थिति के अनुसार राजस्थान में पूर्णतः या अंशतः पड़ने वाली कुल 32 रेल परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 3,447 किलोमीटर है और इनकी कुल लागत 47,498 करोड़ रुपए है। इनमें 15 नई लाइन परियोजनाएं, 5 आमान परिवर्तन परियोजनाएं और 12 दोहरीकरण/बहुपथन परियोजनाएं शामिल हैं।

नई लाइन परियोजनाओं की कुल लंबाई 999 किलोमीटर है, जिनमें से मार्च 2026 तक 239 किलोमीटर लंबाई कमीशन की जा चुकी है और इन पर मार्च 2026 तक 7,602 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। आमान परिवर्तन की 5 परियोजनाओं की कुल लंबाई 1,252 किलोमीटर है, जिसमें से 815 किलोमीटर लंबाई मार्च 2026 तक कमीशन की जा चुकी है और 7,859 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं। दोहरीकरण/बहुपथन की 12 परियोजनाओं की कुल लंबाई 1,196 किलोमीटर है, जिसमें से 268 किलोमीटर लंबाई कमीशन की जा चुकी है और मार्च 2026 तक 7,784 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

इन सभी 32 परियोजनाओं में मार्च 2026 तक कुल 1,322 किलोमीटर लंबाई का कार्य पूरा किया जा चुका है और इन पर कुल 23,245 करोड़ रुपए का व्यय हुआ है।

राजस्थान में हाल ही में पूरी की गई परियोजनाओं में बांगड ग्राम-रास नई लाइन (28 किलोमीटर) परियोजना शामिल है, जिसकी लागत 175 करोड़ रुपए रही। इसके अलावा थईयात हमीरा-सोनू नई लाइन (58 किलोमीटर) पर 350 करोड़ रुपए, सूरतपूड़ा-श्रीगंगानगर आमान परिवर्तन (241 किलोमीटर) पर 896 करोड़ रुपए, सादुलपुर-बीकानेर एवं रतनगढ़-डेगाना आमान परिवर्तन (438 किलोमीटर) पर 886 करोड़ रुपए और जयपुर-चुरू एवं सीकर-लोहारू आमान परिवर्तन (320 किलोमीटर) पर 1105 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

हाल में पूरी हुई अन्य परियोजनाओं में भगत की कोठी-लूनी दोहरीकरण (28 किलोमीटर) पर 128 करोड़ रुपए, रानी-केशव गंज दोहरीकरण (59 किलोमीटर) पर 290 करोड़ रुपए, गुड़िया-मारवाड़ एवं करजोदा-पालनपुर दोहरीकरण (49 किलोमीटर) पर 251 करोड़ रुपए, रानी-मारवाड़ दोहरीकरण (52 किलोमीटर) पर 346 करोड़ रुपए, आबू रोड से स्वरूप गंज दोहरीकरण (26 किलोमीटर) पर 195 करोड़ रुपए और आबू रोड-सरोत्रा रोड दोहरीकरण (24 किलोमीटर) पर 152 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

इसके अलावा अलवर-बांदीकुई दोहरीकरण (60 किलोमीटर) पर 450 करोड़ रुपए, अजमेर-बांगडग्राम दोहरीकरण (48 किलोमीटर) पर 375 करोड़ रुपए, बांगडग्राम-गुड़िया दोहरीकरण (47 किलोमीटर) पर 395 करोड़ रुपए, बीना-कोटा दोहरीकरण (283 किलोमीटर) पर 2,476 करोड़ रुपए, नीमच-चित्तौड़गढ़ दोहरीकरण (56 किलोमीटर) पर 560 करोड़ रुपए, डेगाना-राई का बाग दोहरीकरण (146 किलोमीटर) पर 809 करोड़ रुपए, दौसा-गंगापुर सिटी दोहरीकरण (93 किलोमीटर) पर 950 करोड़ रुपए, फुलेरा-डेगाना दोहरीकरण (108 किलोमीटर) पर 702 करोड़ रुपए, खाटूवास-नारनौल दोहरीकरण (24 किलोमीटर) पर 313 करोड़ रुपए, चुरू-रतनगढ़ दोहरीकरण (43 किलोमीटर) पर 423 करोड़ रुपए और चुरू-सादुलपुर दोहरीकरण (58 किलोमीटर) पर 469 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।

राजस्थान में रेल अवसंरचना को और बेहतर बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर कार्य जारी है। इनमें पुष्कर-मेड़ता नई लाइन (51 किलोमीटर) जिसकी लागत 800 करोड़ रुपए है, तरंगा हिल–आबू रोड नई लाइन (116 किलोमीटर) जिसकी लागत 3,198 करोड़ रुपए है, रामगंजमंडी-भोपाल नई लाइन (277 किलोमीटर) जिसकी लागत 5,073 करोड़ रुपए है और नीमच-बड़ी सादड़ी नई लाइन (48 किलोमीटर) जिसकी लागत 896 करोड़ रुपए है।

इसके साथ ही मेड़ता सिटी-मेड़ता रोड स्टेशन (56 किलोमीटर) पर रास नई लाइन और बाईपास परियोजना की लागत 947 करोड़ रुपए, ग्वालियर-श्योपुरकलां आमान परिवर्तन (284 किलोमीटर) की लागत 3,947 करोड़ रुपए, धौलपुर-सिरमथरा आमान परिवर्तन (145 किलोमीटर) की लागत 747 करोड़ रुपए और अजमेर-चित्तौड़गढ़ आमान परिवर्तन (420 किलोमीटर) की लागत 1,834 करोड़ रुपए है।

अन्य चालू परियोजनाओं में नाथद्वारा-देवगढ़ मदरिया आमान परिवर्तन (83 किलोमीटर) पर 1,597 करोड़ रुपए, मथुरा-झांसी तीसरी लाइन (274 किलोमीटर) पर 5,961 करोड़ रुपए, आगरा फोर्ट-बांदीकुई दोहरीकरण (150 किलोमीटर) पर 988 करोड़ रुपए, सवाई माधोपुर-जयपुर दोहरीकरण (131 किलोमीटर) पर 1,204 करोड़ रुपए, लूनी-भीलड़ी दोहरीकरण (272 किलोमीटर) पर 3,086 करोड़ रुपए, अजमेर-चंदेरिया दोहरीकरण (178 किलोमीटर) पर 1,635 करोड़ रुपए, रेवाड़ी-खाटूवास दोहरीकरण (28 किलोमीटर) पर 352 करोड़ रुपए, उमरा-देबारी दोहरीकरण (25 किलोमीटर) पर 492 करोड़ रुपए, रींगस-सीकर दोहरीकरण (50 किलोमीटर) पर 470 करोड़ रुपए और नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन (568 किलोमीटर) पर 16,403 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजनाएं शामिल हैं।

रेल परियोजनाओं के पूरा होने का समय कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करता है। इनमें राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण, वन संबंधी मंजूरी, बाधक जनोपयोगी सेवाओं का स्थानांतरण, विभिन्न प्राधिकरणों से सांविधिक स्वीकृतियां, क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक और स्थलाकृतिक परिस्थितियां, परियोजना स्थल के क्षेत्र में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति तथा किसी विशेष परियोजना स्थल के लिए किसी वर्ष में कार्य के महीनों की संख्या शामिल हैं। ये सभी कारक परियोजनाओं को पूरा करने के समय और लागत को प्रभावित करते हैं।

Updated On
Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story