सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल नेटवर्क का कायाकल्प: राजस्थान में बिछेगा नई लाइनों का जाल, सामरिक और क्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट 2026-27 में राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए नई रेल परियोजनाओं और कनेक्टिविटी सुधार की घोषणा की है।

जयपुर। भारतीय रेलवे वर्तमान में अभूतपूर्व विस्तार और आधुनिकीकरण के एक ऐतिहासिक दौर से गुजर रही है, जिसे केंद्रीय बजट 2026-27 में आवंटित 2.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड बजटीय प्रावधान से नई शक्ति मिली है। संसद में रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए माननीय रेलमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि देश की सीमाओं को सुरक्षित करने और सामरिक संपर्क को सुदृढ़ बनाने के लिए रेलवे अब 'धीमी प्रगति' के पुराने ढर्रे को छोड़कर 'सुपर-फास्ट ट्रांसफॉर्मेशन' की दिशा में अग्रसर है। रेल मंत्री ने इस परिवर्तनकारी युग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि रेल बजट का आम बजट में विलय एक बड़ा संरचनात्मक सुधार सिद्ध हुआ है, जिससे रेल विकास की राह में तीन प्रमुख लाभ सुनिश्चित हुए हैं।
सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल नेटवर्क को सशक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। रेल मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्रों में नई रेल लाइनों का निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में तेजी से प्रगति पर है। विशेष रूप से, अनूपगढ़ को बीकानेर से जोड़ने वाली 187 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन की डीपीआर 2277 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कर ली गई है, जो वर्तमान में स्वीकृति के आगामी चरण में है। इसके अतिरिक्त, जैसलमेर-भाभर/भीलड़ी वाया बाड़मेर (380 किलोमीटर) और खाजूवाला-जैसलमेर (260 किलोमीटर) के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइनों के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है।
उत्तर और पश्चिमी सीमाओं की सुरक्षा एवं रसद आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए, अनुपगढ़-खाजूवाला और भारत-पाकिस्तान सीमा के समानांतर अन्य महत्वपूर्ण मार्गों को विकसित किया जा रहा है ताकि लॉजिस्टिक्स और पहुंच में सुधार हो सके। केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में भी बारामूला-उरी विस्तार का डीपीआर चरण, काजीगुंड-बडगाम दोहरीकरण और जम्मू-राजौरी-पुंछ कनेक्टिविटी के सर्वेक्षण जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। रेलवे के इन ठोस प्रयासों से न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा अभेद्य होगी, बल्कि स्थानीय नागरिकों को सुगम और बेहतर रेल संपर्क भी प्राप्त होगा। स्थापत्य कला और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के केंद्र राजस्थान में इन रेल परियोजनाओं के पूर्ण होने से धार्मिक, सामाजिक और व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ होंगे, जो अंततः क्षेत्र के समग्र सामाजिक-आर्थिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
